उतरौला बलरामपुर - तहसील क्षेत्र में इन दिनों भीषण गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने से जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। तेज धूप और उमस भरी गर्मी से राहत पाने के लिए बड़ी संख्या में युवा अब गुमड़ी घाट का रुख अपना रहे हैं, जहां कुआनो नदी में घंटों घंटों स्नान कर लोग अपने शरीर को ठंडक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। दोपहर से लेकर शाम तक गुमड़ी घाट अब किसी पर्यटनस्थल जैसा नजर आने लगा है। गर्मी से परेशान युवक समूह बनाकर घाट पर पहुंच रहे हैं और नदी में तैराकी व स्नान का आनन्द भी लेते दिखाई दे रहे हैं। घाट के आस पास लोगों की भीड़, वाहनों की आवाजाही और युवाओं की चहल- पहल लगातार बढ़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से यहां आने वालों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। खासकर दोपहर के समय नदी के किनारे बड़ी संख्या में युवा और किशोर दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए नदी में उतरना कई बार जोखिम भरा साबित हो सकता है। पिछले दिनों में राप्ती नदी और अन्य जलाश यों में डूबने की कई घट नाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन इसके बावजू द भी युवा वर्ग सतर्कता बरतता नहीं दिखाई दे रहा है। कई युवक गहरे पानी में जाकर तैराकी करते हुए नजर आ रहे हैं, जबकि अधिकांश को नदी की गहराई और तेज बहाव की सही जानकारी भी नहीं होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुआ नो नदी के कुछ हिस्सों में अचानक गहराई बढ़ जाती है, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा नदी में फिसलन, तेज बहाव और भंवर जैसी स्थिति यां भी खतरा पैदा कर सकती हैं। इसके बाव जूद भी युवाओं में रोमां च और गर्मी से राहत पाने की चाह के चलते सावधानी की अनदेखी की जा रही है। क्षेत्रीय लोगों ने प्रशासन से घाटों पर सुरक्षाव्यवस्था मजबूत करने, चेतावनी बोर्ड लगाने तथासंवेदन शील स्थानों पर निगरा नी बढ़ाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जागरूकता औरसुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए तो कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। चिकित्सकों और जानकारों का भी कहना है कि अत्यधिक गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए साव धानी बरतना बहुत ही जरूरी है, लेकिन अनि यंत्रित तरीके से नदी में स्नान करना खतरे से खाली नहीं है। विशेष रूप से बच्चों और किशोरों को बिना निग रानी गहरे पानी में जाने से बचना चाहिएभीषण गर्मी के बीच गुमड़ी घाट लोगों के लिए राहत का केन्द्र जरूर बनता जा रहा है, लेकिन सुरक्षा और सतर्कता के अभाव में यह राहत कभी भी बड़े हादसे में बदल सकती है।
हिन्दी संवाद न्यूज से
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उतरौला बलरामपुर।
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