जलालपुर ,अम्बेडकरनगर : स्थानीय चिलवनिया स्थित ऐतिहासिक कर्बला बड़ी दरगाह में ईरान के सर्वोच्च नेता सय्यद अली खामनेई की शहादत की चालीसवीं पर एक भव्य शोक सभा  का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न धर्मों के विद्वानों और विचारकों ने भाग लिया।
शोक सभा को संबोधित करते हुए ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने भारत-ईरान की सदियों पुरानी दोस्ती का हवाला दिया। उन्होंने कहा, "हमारे रहबर (सय्यद अली खामनेई) की इज़राइल-अमेरिका के बर्बरतापूर्ण हमले में हुई शहादत पर ईरान के प्रति भारत की जनता की जो सहानुभूति दिखी, हम उसे कभी फरामोश नहीं कर सकते।"

लखनऊ स्थित टीले वाली मस्जिद के पेश इमाम मौलाना फ़ज़ले मन्नान रहमानी ने कहा कि सय्यद अली खामनेई की शहादत ने पूरी मिल्लत को एक कड़ी में पिरो दिया है। वहीं, स्वामी श्री सारंग जी महाराज ने कहा कि भारत की जनता ईरान के साथ मजबूती से खड़ी है।

इससे पूर्व शोक सभा में आल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव मौलाना यासूब अब्बास, मौलाना कल्बे रूशैद, मौलाना तकी हैदर नक़वी, मौलाना फ़ज़ले मुमताज (जौनपुर), मौलाना मोहम्मद मोहसिन (फैजाबाद), प्रोफेसर अब्बास रज़ा नय्यर, ख्वाजा शिफाअत हुसैन और मौलाना नजीबुल्लाह ने सय्यद अली खामनेई को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में इब्ने अली जाफरी, अहसन रज़ा मीसम और मोहम्मद अब्बास राजा का विशेष सहयोग रहा। अंत में मौलाना रईस हैदर ने उपस्थित सभी अतिथियों एवं आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।

---

Post a Comment

If you have any doubts, please let me know

और नया पुराने