उद्योग–वैज्ञानिक–उद्यमी संवाद 2026” में बकरी पालन की उन्नत तकनीकों का सफल प्रदर्शन एवं हस्तांतरण, वैज्ञानिक–उद्योग–किसान समन्वय को मिली नई दिशा 

भा.कृ.अ.प. – केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मखदूम मथुरा में दिनांक 18 मार्च 2026 को आयोजित “उद्योग–वैज्ञानिक–उद्यमी संवाद 2026” (Industry Scientist Entrepreneur Meet 2026) का आयोजन अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हुआ । इस कार्यक्रम का मुख्य विषय “विज्ञान, उद्योग एवं उद्यमिता के माध्यम से बकरी उत्पादकता को बढ़ावा देना” रहा, जिसका उद्देश्य किसानों, वैज्ञानिकों एवं उद्योग के मध्य समन्वय स्थापित करना था । 


संस्थान निदेशक डॉ0 मनीष कुमार चेटली द्वारा अतिथियों का पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया, कार्यक्रम की शुरूआत जलभरो कार्यक्रम एवं वन्देमातरम व परिषद गीत के साथ की गयी । कार्यक्रय में मुख्य अतिथि के रूप में श्री मुकेश कुमार मेश्राम, आईएएस, मुख्य सचिव पशुपालन विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार, डॉ0 पंकज कौशल, निदेशक आई.जी.एफ.आर.ई, झांसी एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ विकास पाठक, दुवासु मथुरा की गरिमामयी उपस्थिति रही ।


कार्यक्रम में संस्थान के समस्त वैज्ञानिकों, उद्यमियों, स्टार्टअप प्रतिनिधियों, कृषि एवं पशुपालन विशेषज्ञों एवं किसानों की उल्लेखनीय सहभागिता रही, जिससे यह मंच ज्ञान-विनिमय एवं नवाचार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया । कार्यक्रम का संचालन डॉ रवि रंजन एवं डॉ के. गुरूराज, प्रधान वैज्ञानिक द्वारा किया गया ।


कार्यक्रम के दौरान:

संस्थान द्वारा विकसित उत्पादन, बकरी मांस एवं दुग्ध उत्पाद, तथा औषधीय एवं डायग्नोस्टिक की 45 तकनीकों का प्रदर्शन एवं 7 तकनीकों को 9 विभिन्न उद्यमियों/फर्म को हस्तांतरित किया गया । विभिन्न हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं वाणिज्यीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई । 

सतत बकरी एवं पशुधन विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अनुसंधान सहयोग, क्षमता निर्माण तथा वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों के व्यावसायीकरण हेतु 02 (दो) महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए जिससे अनुसंधान–उद्योग सहयोग को सुदृढ़ करते हुए उन्नत एवं वैज्ञानिक पशुपालन को प्रोत्साहन मिलेगा । 

02 अनुबंध अनुसंधान पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे अनुसंधान एवं उद्योग के बीच सहयोग को नई गति मिलेगी । 

उद्यमी–वैज्ञानिक–उद्योग संवाद सत्र आयोजित हुआ, जिसमें बकरी पालन क्षेत्र की चुनौतियों एवं संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई । 

संस्थान द्वारा विकसित मूल्य वर्धित उत्पादों एवं तकनीकों का प्रदर्शन एवं विक्रय भी किया गया । 

वर्तमान में संस्थान के 14 पेटेंट स्वीकृत और 09 फाइल हो चुके है, 26 तकनीकी हस्ताक्षर/बिक्री हो चुकी है ।


संस्थान के निदेशक डॉ. मनीष कुमार चटली ने अपने संबोधन में बकरी पालन को देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं रोजगार सृजन का सशक्त माध्यम बताते हुए कहा कि आज बकरी पालन भारत में लगभग 6.7% की दर से बढ़ रहा है, जो इसकी अपार संभावनाओं को दर्शाता है । बकरी को हम “गरीब की गाय” कहते हैं यह आज “भविष्य का जानवर” के रूप में उभर रहा है । यह संस्थान “लैब से जमीन तक” और “प्रौद्योगिकी से आजीविका” के लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में कार्य कर रहा है ।


आज इस मंच की सबसे बड़ी ताकत यह है कि सभी हितधारक (स्टेकहोल्डर) एक साथ जुड़े हैं । जब ज्ञान, अनुभव और उद्यम एक साथ आते हैं, तभी वास्तविक परिवर्तन होता है । कार्यक्रम के माध्यम से संस्थान द्वारा विकसित उन्नत तकनीकों को किसानों एवं उद्यमियों तक पहुँचाने, नवाचार को बढ़ावा देने तथा व्यावसायिक बकरी पालन को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया ।


संस्थान के वैज्ञानिकों, अतिथिगण एवं उद्यमी जगत के विभिन्न हितधारकों ने पैनलिस्ट के रूप में आपने विचार रखें एवं विभिन्न संबंधित पहलुओं पर चर्चा की ।


यह आयोजन बकरी पालन क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान, उद्योग एवं उद्यमिता के समन्वय का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरा, जिससे भविष्य में इस क्षेत्र में नवाचार, रोजगार सृजन एवं आर्थिक सुदृढ़ता को नई दिशा मिलेगी ।


कार्यक्रम के अंत में संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ योगेश कुमार सोनी ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, आयोजकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया ।

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