बेहतर समन्वय की दिशा में बड़ा कदम...


जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच संवाद को सुगम बनाने के लिए जनपद में "संवाद सेतु" (कमांड सेंटर) की होगी स्थापना


फोन न उठने की समस्या का होगा स्थायी समाधान, जवाबदेही होगी तय


3 प्रशिक्षित ऑपरेटर और स्मार्ट सॉफ्टवेयर के माध्यम से रखी जाएगी हर कॉल पर नजर


अधिकारियों के वर्क-लाइफ बैलेंस और जनप्रतिनिधियों के सम्मान के बीच स्थापित होगा संतुलन


लखनऊ,18 फरवरी। जनपद में जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण और सरकारी तंत्र की संवेदनशीलता सुनिश्चित करने के लिए एक अभिनव पहल "संवाद सेतु" की शुरुआत की जा रही है। इस नीति के अंतर्गत जनपद स्तर पर एक अत्याधुनिक 'जिला संपर्क एवं कमांड सेंटर' (DCCC) स्थापित किया जाएगा, जो जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच संचार की कड़ी के रूप में कार्य करेगा।


विधानसभा में उठा था मुद्दा

अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों का फोन न उठाए जाने का मुद्दा विधानसभा में उठा था। जिस पर समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री असीम अरुण ने सुझाव दिया था। विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट निर्देश जारी किया है। इसी क्रम में राज्य मंत्री ने बुधवार को हरदोई, गाजियाबाद (प्रभारी मंत्री) और कन्नौज के जिलाधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक की। बैठक में निर्णय लिया गया कि 25 फरवरी से तीनों जनपदों में यह व्यवस्था शुरू हो जाएगी। राज्य मंत्री श्री असीम अरुण ने कहा कि योजना का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच सीधा, समयबद्ध और रिकॉर्ड आधारित संवाद स्थापित करना है।


संवादहीनता पर लगाम और त्वरित प्रतिक्रिया:

अक्सर यह देखा गया है कि कुछ अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों के फोन न उठाने से जनहित के कार्य बाधित होते हैं। नई व्यवस्था के अनुसार, यदि कोई अधिकारी जनप्रतिनिधि की कॉल का 10 मिनट के भीतर जवाब नहीं देता है, तो जनप्रतिनिधि कमांड सेंटर को सूचित कर सकेंगे। कमांड सेंटर तत्काल संबंधित अधिकारी को 'कॉल बैक' करने के लिए निर्देशित करेगा और इसकी पुष्टि होने तक समन्वय बनाए रखेगा।

तकनीकी और प्रभावी निगरानी:

इस व्यवस्था को सुचारू चलाने के लिए एक समर्पित स्मार्टफोन और विशेष सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाएगा। सॉफ्टवेयर के माध्यम से अधिकारियों के 'रिस्पॉन्स टाइम' का डेटा सुरक्षित रखा जाएगा। कमांड सेंटर में 3 प्रशिक्षित ऑपरेटर तैनात किए जाएंगे, जो रोटेशन और बैकअप आधार पर कार्य करेंगे।

पारदर्शिता और रियल-टाइम डेटा:

कमांड सेंटर के पास सभी राजपत्रित अधिकारियों की उपलब्धता (ड्यूटी, अवकाश या प्रशिक्षण) का रियल-टाइम डेटा होगा। यदि कोई अधिकारी अवकाश पर है, तो इसकी सूचना तत्काल जनप्रतिनिधि को दी जाएगी ताकि वे वैकल्पिक अधिकारी से संपर्क कर सकें।

कार्यकुशलता और संतुलन:

प्रस्तावित नीति में अधिकारियों के वर्क-लाइफ बैलेंस का भी पूर्ण ध्यान रखा गया है। यह व्यवस्था केवल कार्य दिवसों और कार्यालय समय के दौरान ही प्रभावी होगी। साथ ही, यह सुविधा केवल शासन द्वारा आवंटित CUG/सरकारी नंबरों के लिए मान्य होगी। बेहतर संवाद और त्वरित प्रतिक्रिया देने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि बार-बार लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। इस पहल से न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि जनता की समस्याओं का समाधान भी अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा।

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