चित्तरंजन ज्योतिषी को राष्ट्रपति के हाथों मिला संगीत नाटक अकादेमी रत्न सम्मान
लखनऊ। भारतीय संगीत में योगदान के लिए उत्तर प्रदेश के चित्तरंजन ज्योतिषी को संगीत नाटक अकादेमी का रत्न सम्मान राष्ट्रपति के कर कमलों द्वारा दिया गया। मध्य प्रदेश के सागर में 4 फरवरी 1940 को जन्मे श्री ज्योतिषी ने शिव प्रसाद त्रिपाठी, ओंकारनाथ ठाकुर और बलवंत राय भट्ट जैसे गुरुओं से हिंदुस्तानी गायन संगीत की शिक्षा अर्जित की। ग्वालियर घराने में प्रशिक्षित होने के कारण आपने ख्याल, ध्रुपद, ठुमरी और भजन में भी महारत हासिल की और हारमोनियम और तबला वादन भी सीखा। एक कुशल गायक, संगीतकार और विद्वान के रूप में समादृत श्री ज्योतिषी अपनी विविध संगीत-रचनाओं के लिए ख्यात हैं। आपने 'चित्तरंग' उपनाम से संगीत रचना भी की है।
श्री ज्योतिषी ने कई दशकों तक संगीत शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। आप बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रदर्शन कला संकाय में गायन संगीत विभाग के डीन और विभागाध्यक्ष रहे हैं। आपने ग्वालियर स्थित राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति के रूप में भी अपनी सेवाएँ दीं है। आपने देश-विदेश में व्याख्यान-प्रदर्शन किए हैं, 'राग कल्पद्रुम का विश्लेषणात्मक अध्ययन' नामक पुस्तक लिखी है, और पारंपरिक भारतीय संगीत तथा सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए समर्पित संस्थानों की स्थापना भी की है। आपको बहुत से पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिनमें संगीत नाटक अकादेमी अमृत पुरस्कार, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय एलुम्नस पुरस्कार, सरस्वती सम्मान और उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप प्रमुख हैं।

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