अम्बेडकरनगर में राजकीय मेला घोषित होने के बाद भी नहीं सुधरी तस्वीर
नगपुर(जलालपुर), अम्बेडकरनगर। अंबेडकरनगर के जलालपुर स्थित नगपुर गांव में संत गोविंद साहब की जन्मस्थली आज भी विकास और संरक्षण की बाट जोह रही है। तमसा नदी के तट पर स्थित इस ऐतिहासिक स्थल को लेकर मान्यता है कि करीब 400 वर्ष पहले संत गोविंद साहब का जन्म यहीं हुआ था। एक ओर जहां उनके समाधि स्थल पर भव्य आस्था केंद्र विकसित हो चुका है, वहीं जन्मस्थली पर बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोविंद साहब स्थल पर लगने वाले मेले को राजकीय मेला घोषित किया है, लेकिन जन्मभूमि की बदहाली श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को खल रही है।
जन्मस्थली तक पक्की सड़क तक नहीं
स्थानीय लोगों के मुताबिक संत गोविंद साहब की जन्मस्थली तक पहुंचने के लिए अब तक बेहतर सड़क की व्यवस्था नहीं हो सकी है। श्रद्धालुओं को आवागमन में परेशानी होती है। स्थल पर पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं। स्थानीय निवासी राम सागर का कहना है कि जिस संत की स्मृति से क्षेत्र की पहचान जुड़ी है, उनकी जन्मस्थली को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पाना चिंता का विषय है।
शिवालय की हालत भी जर्जर
जन्मस्थली परिसर में स्थित शिवालय भी देखरेख के अभाव में जर्जर स्थिति में पहुंच गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले इस स्थल का नियमित संरक्षण किया जाना चाहिए। समाधि स्थल पर जिस तरह श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं विकसित की गई हैं, उसी तरह जन्मस्थली पर भी विकास कार्य कराने की जरूरत है।
राजकीय मेला घोषित, फिर भी मूल स्थल उपेक्षित
गोविंद साहब स्थल पर लगने वाले मेले को राजकीय मेला घोषित किया जाना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। लेकिन स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि मेले और संत की स्मृतियों को व्यापक पहचान मिल रही है, तो उनकी जन्मस्थली को विकास की मुख्यधारा से क्यों नहीं जोड़ा जा रहा।
प्रचार के अभाव में नई पीढ़ी से दूर होती विरासत
स्थानीय लोगों के मुताबिक जन्मस्थली का पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं होने के कारण संत गोविंद साहब से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों और मान्यताओं की जानकारी नई पीढ़ी तक नहीं पहुंच पा रही है। करीब चार शताब्दी पुरानी इस विरासत के संरक्षण के लिए इतिहास से जुड़े दस्तावेजों को संकलित करने और स्थल के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने की भी जरूरत है।
पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग
स्थानीय निवासी सुरेंद्र सोनी का कहना है कि यदि सरकार जन्मस्थली का जीर्णोद्धार कराने के साथ सड़क, पेयजल, प्रकाश और श्रद्धालुओं के ठहरने जैसी सुविधाएं विकसित करे तो इसे धार्मिक पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे स्थानीय लोगों को भी रोजगार के अवसर मिलेंगे और संत गोविंद साहब की विरासत को नई पहचान मिलेगी।
समाधि स्थल की तर्ज पर विकास की दरकार
स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन जन्मस्थली का सर्वे कराकर विकास की कार्ययोजना तैयार करे। शिवालय का जीर्णोद्धार, पक्की सड़क, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और श्रद्धालुओं के लिए ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। लोगों का कहना है कि राजकीय मेले की घोषणा के बाद अब जन्मस्थली के विकास पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि संत गोविंद साहब की ऐतिहासिक विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सके।
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