कठिनाइयाँ तो ईश्वर की सौगात है

-- डा. भारती गाँधी, संस्थापिका-निदेशिका, सी.एम.एस.

लखनऊ, 8 जून। ‘‘कठिनाइयाँ तो ईश्वर की सौगात की तरह हैं, जो हमें मानसिक व शारीरिक रूप से मजबूत बनाती हैं। इसलिए जैसे हम सुख को सहर्ष स्वीकार करते हैं, उसी प्रकार कठिनाइयों को भी ईश्वर की सौगात समझकर सहर्ष स्वीकार करना चाहिए’’, ये विचार हैं सिटी मोन्टेसरी स्कूल की संस्थापिका निदेशिका डॉ भारती गाँधी के, जो सी.एम.एस. प्रधान कार्यालय में आयोजित एक वैचारिक-आध्यात्मिक सत्संग सभा में बतौर मुख्य वक्ता बोल रही थीं। सत्संग सभा में श्री राबर्ट गांधी एवं श्री महेश अग्रवाल समेत 50 से अधिक विभिन्न धर्मों के अनुयाइयों ने प्रतिभाग कर अपने विचार व्यक्त किये। 

सत्संग में आगे बोलते हुए डा. भारती गाँधी ने कहा कि मनुष्य हमेशा सुख की चाह रखता है, इसलिए जैसे ही दुख या परेशानी का अहसास होता है वह ईश्वर की आराधना करने लगता है। यदि मनुष्य सुख में भी ईश्वर की आराधना करता रहे, तो उसे आने वाली परेशानियों का सामना करने की शक्ति मिलेगी। इसलिए हमें हमेशा सुख-दुख में समान रूप से परमेश्वर को याद करते रहना चाहिए।

डॉ. भारती गाँधी ने कहा कि ईश्वर जब सारे सुखों को प्रदान करता है, तो वह मनुष्य की परीक्षा भी लेता रहता है कि आप सुख में पड़कर परमेश्वर की शिक्षाओं को भूल तो नहीं गये। ईश्वर कठिनाइयाँ उत्पन्न कर आपकी परीक्षा लेता रहता है और अहसास कराता है कि परमेश्वर की भक्ति बगैर आप सुख का अनुभव भी न कर पायेंगे क्योंकि उसने आपको अच्छे कार्यों को करने लिए इस दुनिया में उत्पन्न किया है।

इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए श्री राबर्ट गांधी ने कहा कि सुख का समय छोटा व दुख का समय बड़ा लगता है क्योंकि दुख के दिन गिन गिन कर काटता है। यदि मनुष्य सुख की तरह दुख का भी अहसास न कर उसे साधारण मानता है तो उसे दुख भी छोटा लगेगा। उन्होंने आगे कहा कि मनुष्य अपनी जीवन शैली को ईश्वर की शिक्षाओं के अनुसार चलाये, तो उसे कठिनाइयों से मुक्ति मिल सकती है और वह परमेश्वर का प्रिय भक्त बन सकता है। सत्संग का समापन एक बहुत ही प्रेरणादायी भजन ‘‘वैष्णव जन ते तेने कहिये जे ...’’ की प्रस्तुति एवं प्रसाद वितरण से हुआ।


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