उत्तर प्रदेश में डिजिटल क्रांति का नया अध्याय: ए.आई. फॉर ऑल से संवरेगा युवाओं का भविष्य

दिनांक: 13 जून, 2026

सूचना प्रौद्योगिकी और आधुनिक विज्ञान के इस दौर में उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रदेशभर में श्।प् वित ।ससश् (सभी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) प्रोग्राम को लागू कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (न्च्ैक्ड) द्वारा वैश्विक आईटी दिग्गज ‘ओरेकल यूनिवर्सिटी’ (व्तंबसम न्दपअमतेपजल) के सहयोग से संचालित यह कार्यक्रम राज्य के हर नागरिक को मुफ्त में एआई (।प्) का प्रशिक्षण प्राप्त करने का सुनहरा अवसर दे रहा है। इस महत्वाकांक्षी प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के गांव-गांव, कस्बे और शहरों के युवाओं को भविष्य की सबसे अधिक मांग वाली तकनीक यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जोड़ना है। प्रदेश सरकार का ध्येय है कि डिजिटल भारत के सशक्त निर्माण के लिए हर नागरिक को तकनीकी रूप से साक्षर होना अनिवार्य है। यह कार्यक्रम सिर्फ एक प्रशिक्षण सत्र नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी ‘डिजिटल और एआई हब’ बनाने की दिशा में एक बड़ा क्रांतिकारी कदम है।

इस बेहद महत्वपूर्ण और भविष्योन्मुखी कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ प्रदेश के मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा 13 अप्रैल, 2026 को मुजफ्फरनगर में आयोजित एक भव्य ‘वृहद रोजगार मेले’ के दौरान किया गया था। मुजफ्फरनगर की धरती से शुरू हुआ यह अभियान अब उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। शुरुआती चरणों में इस कार्यक्रम को लेकर युवाओं में भारी उत्साह देखा गया। कॉलेज के विद्यार्थियों से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों, कामकाजी पेशेवरों और यहां तक कि आम गृहणियों और छोटे दुकानदारों ने भी इस कोर्स में गहरी रुचि दिखाई है। सरकार की इस पहल को वैश्विक आईटी संस्था ओरेकल यूनिवर्सिटी का तकनीकी सहयोग प्राप्त है, जिससे इस पाठ्यक्रम की गुणवत्ता और विश्वसनीयता वैश्विक स्तर की हो जाती है।

वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से रोजगार और उद्योगों का स्वरूप बदल रहा है। आज दुनिया के हर क्षेत्र में-चाहे वह शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो, कृषि हो या विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग)-एआई का दखल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार का मुख्य ध्येय है कि उत्तर प्रदेश का युवा इस तकनीकी बदलाव में पीछे न छूटे। युवाओं को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी कौशल से भी लैस किया जा रहा है ताकि वे आत्मनिर्भर बनें और रोजगार के नए अवसरों को हासिल कर सकें। इसी क्रम में सभी जनपदों में इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किये जा रहे है, ताकि गांव, कस्बों और शहरी क्षेत्रों के अधिकाधिक युवा इस निःशुल्क प्रशिक्षण से जुड़ सकें।

ए.आई. के प्रशिक्षण कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसका सरल, सुलभ और संक्षिप्त होना है। इस कोर्स को ‘।प् वित ल्वनरू ट्रेनिंग एंड असेसमेंट’ नाम दिया गया है, जो मात्र 3 घंटे की अवधि का है। व्यस्त दिनचर्या के बीच कोई भी व्यक्ति इसे आसानी से पूरा कर सकता है। इस पाठ्यक्रम को पूरी तरह से ऑनलाइन माध्यम पर डिजाइन किया गया है, जिसके लिए अभ्यर्थियों को किसी संस्थान या कोचिंग सेंटर के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है। लोग अपने घर, कॉलेज या कॉमन सर्विस सेंटर (ब्ैब्) पर बैठकर अपने मोबाइल या लैपटॉप के जरिए इस प्रशिक्षण को प्राप्त कर सकते हैं। 3 घंटे का ऑनलाइन वीडियो और स्टडी मटेरियल का मॉड्यूल पूरा करने के बाद अभ्यर्थियों को एक ऑनलाइन मूल्यांकन (असेसमेंट) परीक्षा से गुजरना होता है। इस परीक्षा में सफल होने वाले सभी प्रतिभागियों को ओरेकल यूनिवर्सिटी और उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की ओर से संयुक्त रूप से एक प्रामाणिक डिजिटल सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है, जो उनके बायोडाटा (सीवी) को मजबूत करेगा और भविष्य में नौकरी/रोजगार के अवसरों में उन्हें प्राथमिकता दिलाएगा।

प्रदेश सरकार इस प्रोग्राम को ‘जन-जन की तकनीक’ बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। प्रदेश की विशाल आबादी को देखते हुए इस कार्यक्रम को हर स्तर पर सुचारू रूप से चलाने के लिए माइक्रो-प्लानिंग की गई है। उ0प्र0 कौशल विकास मिशन निदेशालय द्वारा प्रदेश की सभी जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों (क्च्डन्े) को लक्ष्य दिया गया है कि वे अपने-अपने जिलों के स्कूलों, कॉलेजों, आईटीआई (प्ज्प्), पॉलिटेक्निक संस्थानों और कौशल विकास केंद्रों के माध्यम से अधिकतम पंजीकरण सुनिश्चित करायें। प्रदेश सरकार विशेष रूप से उन युवाओं पर अधिक फोकस कर रही है, जो आर्थिक तंगहाली के कारण महंगे तकनीकी कोर्स नहीं कर पाते हैं। ओरेकल यूनिवर्सिटी जैसी विश्व प्रसिद्ध संस्था से मुफ्त में सीखने का यह अवसर उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।

देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश के युवाओं के पास एआई का बुनियादी ज्ञान होगा, तो वे वैश्विक जॉब मार्केट में नहीं पिछड़ेंगे। श्।प् वित ।ससश् के तहत सिखाए जाने वाले मुख्य बिंदुओं में एआई की बुनियादी समझ, मशीन लर्निंग, डेटा का महत्व, दैनिक जीवन में इसकी उपयोगिता जैसे चौटबॉट्स, वॉयस असिस्टेंस (जैसे एलेक्सा, सिरी), और सर्च इंजन के पीछे काम करने वाली तकनीक के साथ-साथ एआई तकनीक का सही, सुरक्षित और नैतिक इस्तेमाल शामिल है। यह कोर्स इस तरह से तैयार किया गया है कि इसके लिए किसी को पहले से कोडिंग या कंप्यूटर प्रोग्रामिंग आने की जरूरत नहीं है। एक कला (।तजे) या वाणिज्य (ब्वउउमतबम) का छात्र भी इसे उतनी ही आसानी से समझ सकता है, जितनी आसानी से एक विज्ञान या इंजीनियरिंग का छात्र समझता है।

उत्तर प्रदेश सरकार के इस कदम की सराहना न केवल प्रदेश के भीतर बल्कि देश के बड़े तकनीकी और शैक्षणिक हलकों में भी हो रही है। आमतौर पर ओरेकल जैसी कंपनियों के तकनीकी कोर्स और सर्टिफिकेट के लिए हजारों रुपये की फीस चुकानी पड़ती है। प्रदेश सरकार द्वारा इसे हर नागरिक के लिए मुफ्त करके शिक्षा और तकनीक के लोकतंत्रीकरण (क्मउवबतंजप्रंजपवद) का एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया गया है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों के अनुसार, आज कंपनियां ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रही हैं जो तकनीकी रूप से जागरूक हैं। भले ही कोई युवा एडमिनिस्ट्रेशन, मार्केटिंग, सेल्स या अकाउंट्स की नौकरी के लिए आवेदन कर रहा हो, अगर उसके पास श्।प् वित ल्वनश् का सर्टिफिकेट होगा, तो उसे दूसरों पर बढ़त मिलेगी क्योंकि वह एआई टूल्स का उपयोग करके काम को तेजी से और बेहतर तरीके से निपटा सकता है।

उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने पंजीकरण की प्रक्रिया को बेहद सरल रखा है ताकि कम पढ़े-लिखे या ग्रामीण परिवेश के युवा भी बिना किसी बाधा के इसका हिस्सा बन सकें। इच्छुक अभ्यर्थियों को सबसे पहले उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (न्च्ैक्ड) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ (होमपेज) पर ही श्।प् वित ।ससश् नाम से एक विशेष टैब दिया गया है। उस टैब पर क्लिक करने के बाद एक सरल फॉर्म खुलता है, जहां अभ्यर्थी को अपना नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और जिले का नाम दर्ज करना होता है। पंजीकरण पूरा होते ही अभ्यर्थी को कोर्स का एक्सेस मिल जाता है, और वे अपनी सुविधानुसार कभी भी 3 घंटे का यह ऑनलाइन कोर्स देखना और सीखना शुरू कर सकते हैं। कोर्स के अंत में एक छोटा सा टेस्ट ऑनलाइन ही आयोजित होगा, जिसे पास करते ही सर्टिफिकेट को तुरंत डाउनलोड किया जा सकेगा।

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-धर्मवीर खरे


















 


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