गर्मी और लापरवाही ने ली नीलगाय की जान,शव के निस्तारण न होने से ग्रामीणों में रोष 



 जलालपुर, अम्बेडकर नगर। वनों की कटाई से क्षेत्र में बढ़ती गर्मी और ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभाव अब साफ तौर पर दिखाई देने लगे हैं। इसका असर केवल इंसानों तक सीमित नहीं रहकर वनस्पतियों और पशु-पक्षियों पर भी पड़ रहा है।


मंगलवार दोपहर तहसील क्षेत्र के साईंपुर समसपुर गांव में कटे गेहूं के खेतों के बीच एक नीलगाय को तड़पते देख ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों ने तत्काल ग्राम प्रधान और वन विभाग को सूचना दी, लेकिन मौके पर पहुंचे वन कर्मियों ने केवल औपचारिकता निभाते हुए निरीक्षण किया और वापस लौट गए।




इसी दौरान मौके पर मौजूद प्रशिक्षित आपदा मित्र सौरभ सिंह ने पशु चिकित्सा एम्बुलेंस 1960 को सूचना दी। सूचना पर पहुंची टीम ने तेज धूप में तड़प रही नीलगाय का इलाज कर उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई।


पशु चिकित्सक डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि अत्यधिक गर्मी और पानी की कमी इस घटना का मुख्य कारण हो सकता है। साथ ही नीलगाय के शरीर पर कुत्तों के काटने के निशान भी मिले हैं, जो आवारा कुत्तों की बढ़ती आक्रामकता की ओर संकेत करते हैं। इससे भविष्य में पालतू पशुओं और मनुष्यों पर हमलों का खतरा बढ़ सकता है।




घटना के बाद ग्राम प्रधान की अनुपस्थिति को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश देखा गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया की सूचना के बावजूद ग्राम प्रधान मौके पर नहीं पहुंचे और न ही नीलगाय को दफनाने का कोई प्रयास किया। 



भीड़ हटने के बाद आवारा कुत्तों ने व कौवों ने नीलगाय के शव को क्षत-विक्षत करना शुरू कर दिया। तेज धूप व गर्मी से नीलगाय के शव में सड़न शुरू हो गई है तथा तेज़ दुर्गंध ने लोगों की समस्या और भी बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों ने खेत में पड़ी मृत नीलगाय को जल्द से जल्द दफनाने की मांग की।


बता दें कि डायल 1962 उत्तर प्रदेश में संचालित एक पशु चिकित्सा एम्बुलेंस सेवा है, जिसे बीमार, घायल एवं असहाय पशुओं के त्वरित इलाज और बचाव के लिए शुरू किया गया है। यदि कोई पशु घायल हो, सड़क हादसे में जानवर जख्मी हो जाए, कोई आवारा पशु बीमार या तड़प रहा हो या किसी पशु को तुरंत इलाज की आवश्यकता हो, तो इस सेवा पर कॉल किया जा सकता है। यह सुविधा समय पर उपचार उपलब्ध कराकर पशुओं की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वर्तमान समय में राजकीय पशु चिकित्सालय जलालपुर में कार्यरत डॉ जितेन्द्र सिंह तथा वेटरनरी सहायक अंबुज इस सेवा की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।




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जीवन 





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