बलरामपुर- जनपद में मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वन विभाग द्वारा भाभर रेंज एवं मानव वन्य जीव संघर्ष के दृष्टि से संवेदनशील अन्य ग्रामों  तेंदुए की हलचल पर नजर रखने के लिए दो विशेष टीमों का गठन किया गया है। आज दिनांक 13.04.2026 को सुबह 6:00 से 9:00 बजे के बीच वन क्षेत्र से सटे ग्राम रेहरा, बेलभरिया, परसरामपुर और पिपरा सडवा में लगभग 5-6 किमी पैदल ट्रैकिंग कर पगमार्क (पदचिह्न) की जांच की गई। ग्राम बनगंवा के पास तेंदुए के पगमार्क की पुष्टि होने के बाद अब ड्रोन कैमरों के माध्यम से सघन निगरानी की जा रही है।
​जनपद के तराई क्षेत्रों में मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ विपिन कुमार जैन ने आज कलेक्ट्रेट सभागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस बैठक में पचपेड़वा, गैंसड़ी, हरैया सतघरवा और तुलसीपुर ब्लॉक के ग्राम प्रधानों एवं ग्राम पंचायत सचिवों को सीधे निर्देश दिए गए।
*​वन और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम करेगी काम*
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वन्यजीवों से बचाव और जागरूकता हेतु वन विभाग एवं राजस्व विभाग आपसी समन्वय के साथ संयुक्त रूप से कार्य करेंगे।
​लेखपाल और वन रक्षक संवेदनशील गाँवों में निरंतर भ्रमण करेंगे।
​वन क्षेत्र की सीमाओं से लगे राजस्व ग्रामों में सुरक्षा घेरा मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधानों से कहा कि वे अपने स्तर से गाँवों में मुनादी कराएं और ग्रामीणों को झुंड में बाहर निकलने के लिए प्रेरित करें।
ग्राम पंचायत सचिवों को निर्देशित किया गया कि वे सफाई व्यवस्था और प्रकाश (Street Lights) का प्रबंध सुनिश्चित करें ताकि अंधेरे का लाभ उठाकर वन्यजीव आबादी में न घुस सकें।
​बैठक में बताया गया कि वन्यजीव पानी की तलाश में नदी-नालों के पास आते हैं, अतः इन क्षेत्रों में अकेले जाना प्रतिबंधित किया जाए।
*​सुरक्षा हेतु तकनीकी निगरानी*
भांभर रेंज व आस-पास के क्षेत्रों में ड्रोन कैमरों और कैमरा ट्रैप के जरिए तेंदुए की लोकेशन ट्रैक की जा रही है। वन विभाग की टीमें सुबह 6:00 से 9:00 बजे और शाम के समय नियमित कॉम्बिंग कर रही हैं।
भांभर रेंज के वन क्षेत्र के सटे व निकटवर्ती क्षेत्रों / गांवों में बैनर, पोस्टर एवं ई-रिक्शा व लाउडस्पीकर के माध्यम से "क्या करें, क्या न करें" के तहत जागरूक करते हुए लगातार गश्त करते हुए जल सामान्य को बचाव हेतु जागरूक करते हुए वन क्षेत्र में प्रवेश न करने हेतु सचेत किया जा रहा है। साथ ही साथ संवेदनशील गांवों/क्षेत्रों (रेहरा, परसुरामपुर) में ड्रोन के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है। सांयकाल अंधेरा होने पर पूर्व के भांति वन क्षेत्र के निकटवर्ती एंव संवेदनशील ग्रामों में पटाखा भी फोडे जाने के निर्देश दिये जा चुके हैं, ताकि हिंसक वन्य जीव आवाज के भय से आबादी वाले क्षेत्र की ओर अग्रसर न हो सकें।
​उक्त के अतिरिक्त घटना स्थल एंव मानव वन्य जीव संघर्ष के दृष्टि से संवेदनशील अन्य ग्रामों में कैमरा ट्रैप स्थापित कर वन्य जीवों के मूवमेन्ट पर लगातार निगरानी रखने एंव ग्राम प्रधानों से समन्वय स्थापित कर नियमित चौपाल, गोष्ठी आयोजित करते हुए जनमानस को महुआ एकत्र करने, पालतू जानवरों को चराने, लकड़ी का चुगान करने हेतु कदापि वन क्षेत्र में प्रवेश न करने बावत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करते हुए ग्रामीणों को सचेत/जागरूक करने की कार्यवाही प्रारम्भ कर दी गयी है।
डीएफओ​ ने समस्त जनमानस से अनुरोध है कि कदापि वन क्षेत्र में प्रवेश न करें तथा तात्कालिक सहायता हेतु  क्षेत्रीय वनाधिकारी भांभर के मो० न० - 7570048066 , क्षेत्रीय वनाधिकारी रामपुर के मो० न० - 8887852844 ,क्षेत्रीय वनाधिकारी तुलसीपुर के मो० न०  9517170830, क्षेत्रीय वनाधिकारी बरहवा के मो० न० - 8400293292,  क्षेत्रीय वनाधिकारी बनकटवा के मो० न०  9919248813,  क्षेत्रीय वनाधिकारी पूर्वी सोहेलवा के मो० न०  - 8299660750,  क्षेत्रीय वनाधिकारी पश्चिमी सोहेलवा के मो० न०  9899614259, 
उप प्रभागीय वनाधिकारी, तुलसीपुर  के मो० न० - 8318250149 पर अथवा स्थानीय पुलिस विभाग को दें।


                हिन्दी संवाद न्यूज से
                 रिपोर्टर वी. संघर्ष
                    बलरामपुर। 

Post a Comment

If you have any doubts, please let me know

और नया पुराने