उतरौला बलरामपुर- थाना कोतवाली उतरौला अन्तर्गत ग्रामअमया देवरिया में सोमवार को रात्रि में लगभग 09 बजे अंजुमने हुसैनिया के तत्वाधान में देवरिया मस्जिद से ईरान के सुप्रीम लीडर और दुनिया भर में शिया समुदाय के प्रमुख धर्मगुरु आयतुल्लाह अली ख़ामेनाई की शहादत के सिलसिले में एक कैण्डल मार्च निकला गया। जुलूस की अगुवाई मौलाना ज़ायर अब्बास और मौलाना फिदा हुसैन ने किया। जिसमें भारी संख्या में महिलाएं व पुरुष लोग मौजूद रहे। हाथों में कैंडल अपने रहबर की तस्वीर और अपने दिल में दर्द लिए लोग उन्हें याद करके आंसू बहा रहे थे। जहाँ आयतुल्लाह अलीख़ामे नाई ज़िन्दाबाद के नारे लगा कर उनके चाहने वाले उन्हें याद कर रहे थे। वहीँ इज़राइल मुर्दा बाद, अमरीका मुर्दाबाद नेतनयाहू मुर्दाबाद, डोनाल्ड ट्रम्प मुर्दाबाद, के नारों के द्वारा लोग अपने ग़ुस्से का इज़हार भी कर रहे थे। जुलूस गाँव के विभिन्न रास्तों से होता हुआ, दरगाह हज़रत अब्बास पर पहुंचाकर एक शोक सभा को सम्बोधित करते हुए मौलाना ज़ायर अब्बास ने कहा कि इस्लाम धर्म मेंज़ुल्म करना और ज़ुल्म सह ना दोनों मना है। ईमाम हुसैन के मानने वाले ज़ुल्म के सामने अपना सर कटा तो सकते हैँ लेकिन अपना सरझुका नहीं सकते हैं। आज उन्हीं के चाहने वाले आयतुल्लाह अली ख़ामेनाई ने शहादत को गले लगा लिया। लेकिन बातिल के सामने अपना सर नहीं झुकाया। मौलाना फ़िदा हुसैन ने कहा कि चौदह सौ साल पहले ईमाम हुसैन ने यज़ीद से कहा था, कि मुझ जैसा तुझ जैसे की बैयत कभी नहीं कर सकता हूं, तो भला आयतुल्लाह अलीख़ामे नाई कैसे अरब मुल्कोँ की तरह अमरीका इज़ राइल की बैयत कर लेते।मौलाना इमरान उतरौलवी ने कहा कि कल इसी रमज़ान के पाक महीने में हज़रत अली को शहीद किया गया, तो आज उन्हीं के एक ग़ुलामआयतुल्लाह अली ख़ामेनाई कोशही द किया गया है। इंशाल्लाह दुश्मनों से इसका बदला ज़रूर लिया जायेगा। विश्व के विख्यात कवि शुजा उतरौलवी ने अपनी पंक्तियों के द्वारा अपने रहबर को विन्रम श्रद्धां जलि अर्पित की,अन्त में अपने मुल्कहिन्दुस्ता न की तरक़्क़ी,और भाई चारे, अमन शांति के लिए दुआ की गई। इस अवसर पर अमया देवरिया, उतरौला,रेहरा माफ़ी, रैगावां, पिपरा, बंजहा और आस पास के ग्रामीण अंचलों के लोग मौजूद रहे।
हिन्दी संवाद न्यूज से
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उतरौला बलरामपुर।
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