उतरौला बलरामपुर-नगर सहित आस पास के ग्रामीण अंचलों में महाशिवरात्रि का पावन पर्व पर श्रद्धा, आस्था और भक्ति केवातावरण माहौल में बड़े ही धूम धाम से मनाया गया। शिव भक्तों ने भगवान भोलेनाथ एवं माता पार्वती कोजलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक तथा विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से प्रसन्न करने का काम दिन भर जारी रखा। सुबह से ही मन्दिरों में“हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष गूंजते रहे, जिससे पूरा नगर शिव मय हो उठा। नगर के प्रसिद्ध दुख हरण नाथ मन्दिर, पिपलेश्वर महा देव मन्दिर, मोहल्ला गांधी नगर में स्थित ब्रह्मा बाबा तथा डाक बंगला के बगल शनि देव मन्दिर के अलावा नगर और ग्रामीण क्षेत्रों के सैकड़ों मन्दिरों पर दर्शन एवं जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की लम्बी कतारें लगी रहीं। महिलाएं, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग सभी व्रत रख कर शिव-पार्वती की आराधना में लीन होते हुए दिखाई पड़े।
महाशिवरात्रि के अव सर पर नगर व ग्रामीण अंचलों में श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह लंगर व भंडारे का आयोजन भी किया गया। इसी क्रम में मोहल्ला गांधी नगर पुलिस चौकी के सामने स्थित ब्रह्मा बाबा के स्थान पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जहां सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य का लाभ अर्जित किया पूरे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही, और लोगों ने सेवा भाव से प्रसाद वितरण कर धार्मिक परम्परा को निभाया। ब्रह्मा बाबा स्थान पर आयोजित भंडारे में शामिल श्रद्धालुओं ने कहा कि शिव भक्ति और सेवा का यह अवसर समाज में भाई चारा और सहयोग की भावना को मजबूत कर ता है। भंडारे में दूर- दराज से आए हुए भक्तों ने भाग लेकर भगवान शिव सेअपने परिवार की सुख- समृ द्धि और स्वास्थ्य की कामना की महाशिव रात्रि के पर्व पर नगर में प्रशासन भी पूरी तरह सतर्कता रही। श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु यातायात व्यवस्था सुचारू रूप रखी गई तथा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम भी किए गए। प्रमुख मन्दिरों के आस पास पुलिस बल की तैनाती रही, जिससे दर्शन-पूजन शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। नगर वासियों ने प्रशासन कीव्यवस्थाओं की सराहना की। दुखहरण नाथ मन्दिर के महन्त मयंक गिरी ने बताया कि महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह का प्रतीक पर्व है। पुराणों के अनुसार इसी रात्रि को भगवान शिव का प्राकट्य हुए थे,तथा सृष्टि के कल्याण के लिए उन्होंने तांडव भी किया था, इस दिन उप वास, रात्रि जागरण, बेल पत्र, धतूरा, भांग, दूध और जल अर्पित करने से मनुष्य केपापों का क्षय होता है, तथा मोक्ष की प्राप्ति कामार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने यह भी कहा कि शिव की आराधना का वास्त विक अर्थ केवल पूजा नहीं, बल्कि संयम, करु णा, सत्य और सेवा के मार्ग पर चलना है। पूरे नगर में दिन भर धार्मि क उल्लास का वाता वरण बना रहा। हर मन्दिरों पर भजन- कीर्तन और रात्रि में जागरण आयोजित हुआ, जहां भक्तों ने पूरी रात भगवान शिव का स्मरण किया। इस भक्ति मय छटा ने पूरे नगर को शिवमय बना दिया, और श्रद्धालुओं ने भगवान भोले नाथ से सुख,शांति और समृद्धि की कामना की।

              हिन्दी संवाद न्यूज से
             असगर अली की खबर
              उतरौला बलरामपुर। 

Post a Comment

If you have any doubts, please let me know

और नया पुराने