उ0प्र0 के मुख्यमंत्री तथा उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने
पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड में इण्टर कॉलेज, यमकेश्वर के नवनिर्मित भवन
का लोकार्पण तथा विद्यालय के मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया

उत्तराखण्ड विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा, यह विकास एकतरफा नहीं, बल्कि अपनी सभ्यता और संस्कृति तथा 
अपने उच्च आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित रखते हुए जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विकास के नये आयाम स्थापित हो रहे : मुख्यमंत्री, उ0प्र0

भारत का नेतृत्व राष्ट्रऋषि प्रधानमंत्री जी के हाथों में,
जो देश को विकास की नित नई ऊंचाइयों की ओर ले जा रहे

विद्यालय केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहें,
बल्कि संस्कार, कौशल तथा जीवन निर्माण के केन्द्र बनें

जीवन में वही सफल होता, जो सकारात्मक भाव के साथ
अपने पुरुषार्थ और परिश्रम से आगे बढ़ने में विश्वास रखता

हमारे विद्यालय स्किल डेवलपमेन्ट के केन्द्र हो सकते,
उत्तराखण्ड सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाए

सरस्वती वन्दना, राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत हमारे संस्कार के प्रतीक

बच्चों को गांव में रहकर पढ़ाने की प्रवृत्ति से जोड़ें, गांवों को शिक्षा,
नवाचार तथा शोध के नए केन्द्र के रूप में विकसित करना होगा

बच्चों की प्रतियोगी परीक्षाआें की तैयारी के लिए उ0प्र0 में
अभ्युदय कोचिंग का संचालन प्रारम्भ किया गया, इसके अच्छे परिणाम आ रहे

योगी जी का जीवन सभी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत कि परिस्थितियां
चाहे जैसी भी हों, यदि राष्ट्र और समाज के प्रति समर्पण का भाव हो,
तो कोई भी कार्य असम्भव नहीं होता : मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड

योगी आदित्यनाथ जी सनातन संस्कृति के रक्षक, उन्होंने उ0प्र0 में सुशासन की स्थापना की

उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश उत्तम प्रदेश बनकर देश के विकास की अग्रिम पंक्ति में खड़ा

लखनऊ : 06 फरवरी, 2026

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी तथा उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी ने आज पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड में इण्टर कॉलेज, यमकेश्वर के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने विद्यालय के मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया। मुख्यमंत्री जी ने यमकेश्वर महादेव की पावन धरा को नमन करते हुए सभी को इण्टर कॉलेज के नवनिर्मित भवन की बधाई दी।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि उत्तराखण्ड विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है। यह विकास एकतरफा नहीं है, बल्कि अपनी सभ्यता और संस्कृति तथा अपने उच्च आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित रखते हुए जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विकास के नये आयाम स्थापित हो रहे हैं। भौतिक विकास जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि उसका एक पक्ष है। यह तात्कालिक आवश्यकताओं की पूर्ति का माध्यम है। वास्तविक और सार्थक विकास वही है, जो अपनी सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों का सम्मान करते हुए हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करे। शिक्षण संस्थानों को इसी सोच के साथ स्वयं को तैयार करना होगा, ताकि विद्यालय केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि संस्कार, कौशल तथा जीवन निर्माण के केन्द्र बनें।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हर सनातन धर्मावलम्बी अपने आप को किसी न किसी गोत्र से सम्बन्धित करता है। यह गोत्र हमारी ऋषि परम्परा का प्रतिनिधित्व करता है, जो उनके प्रति हमारी कृतज्ञता को भी व्यक्त करता है। प्राचीनकाल में ऋषियों के आश्रम हमारी शिक्षा के केन्द्र थे, जिन्हें गुरुकुल भी कहते थे। यह गुरुकुल अध्ययन के साथ ही शिक्षा, शिल्प, कृषि, आयुर्वेद सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में पारंगत बनाने के केन्द्र भी थे। यहां से निकले छात्र जीवन संग्राम में अपने आपको असहाय नहीं पाते थे। उनके लिए कोई कार्य छोटा अथवा कठिन नहीं होता था।
जीवन में वही सफल होता है, जो सकारात्मक भाव के साथ अपने पुरुषार्थ और परिश्रम से आगे बढ़ने में विश्वास रखता है। यह हमारा सौभाग्य है कि वर्तमान में भारत का नेतृत्व राष्ट्रऋषि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के हाथों में है, जो देश को विकास की नित नई ऊंचाइयों की ओर ले जा रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 हमारा ध्यान आकर्षित करती हैं कि विद्यालय केवल पुस्तकीय ज्ञान देने तक सीमित न रहे, बल्कि व्यावहारिक जानकारी प्रदान करने के केन्द्र भी बनें। हमें इस दिशा में बढ़ना होगा।
हमारे विद्यालय स्किल डेवलपमेन्ट के केन्द्र हो सकते हैं। उत्तराखण्ड सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इण्टर कॉलेज, यमकेश्वर में स्मार्ट क्लासेज, स्किल लैब, डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं हैं। वर्तमान समय की उभरती हुई तकनीकों का केन्द्र बिन्दु हमारे शिक्षण संस्थान बन रहे हैं। इस कॉलेज की स्थापना स्व0 श्री सोहन सिंह चौहान द्वारा की गयी थी। उस समय यमकेश्वर में साधन, सड़कें एवं विद्युत की व्यवस्था नहीं थी। आज गांव-गांव में बिजली, पेयजल तथा सड़कें हैं। आवागमन आसान हुआ है। अच्छी कनेक्टिविटी हो गई है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज इण्टर कॉलेज में भव्य भवन का निर्माण हो गया है। सरकार जो सुविधाएं दे रही है, उसके अनुरूप शिक्षा की गुणवत्ता ठीक करना शिक्षकों का दायित्व है। छात्रों का दायित्व है कि पूर्ण मनोयोग से पढ़ें। विद्यालय हमारी शिक्षा, संस्कृति और सभ्यता के भी आधार स्तम्भ बनें। हमें अपनी शिक्षा को संस्कारों के साथ जोड़ना है। सरस्वती वन्दना, राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत हमारे संस्कार के प्रतीक हैं। हमने ज्ञान की देवी के रूप में माँ सरस्वती को पूजा है। सरस्वती वन्दना मातृ शक्ति के प्रति हमारे मन में श्रद्धा के भाव से जोड़ती हैं। माँ सरस्वती व्यक्ति, जाति, मत और मजहब में भेद नहीं करतीं। जो भी मेहनत करेगा, सही दिशा में सोचेगा और सकारात्मक भाव से कार्य करेगा, माँ सरस्वती की कृपा उस पर बरसती हुई दिखाई देगी। इसी प्रकार महादेव के मन्दिर में जो आएगा, वही आशीर्वाद प्राप्त करेगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि नकारात्मकता व्यक्ति को जीवन में हमेशा पतन और दुर्गति की तरफ ले जाती है। सकारात्मकता हमारी गति को प्रगति की ओर बढ़ाती है। यह हमें ही तय करना है कि हमें प्रगति अच्छी लगती है या दुर्गति। प्रगति के लिए सकारात्मक सोच अनिवार्य है। हमारे मन में अपने देश के लिए कुछ करने की सोच होनी चाहिए। उत्तराखण्ड देवभूमि है। यहां के नौजवान सीमाओं पर देश की रक्षा करते हैं। यहां के लोग जिस भी क्षेत्र में हैं, उन्होंने अपनी प्रभावी उपस्थिति से देश और समाज को एक नई दिशा दी है तथा इन्हें आगे बढ़ाने में मदद की है।
यहां के हिमालय से निकला हुआ जल पूरे उत्तर भारत की भूमि को उपजाऊ बनाता है और देश का पेट भरता है। यह दुनिया के लिए खाद्यान्न आपूर्ति तथा बागवानी का माध्यम बनता है। हम सबका दायित्व है कि बच्चों को गांव में रहकर पढ़ाने की प्रवृत्ति से जोड़ें। गांव हमारी सभ्यता के मूल हैं। हमें गांवों को पलायन से बचाना होगा। गांवों को शिक्षा, नवाचार तथा शोध के नए केन्द्र के रूप में विकसित करना होगा। हमारे गांव फिर से ग्राम स्वराज की उस परिकल्पना को साकार करें, जिसके लिए वह जाने जाते थे। गांवों में स्वावलम्बन और आत्मनिर्भरता थी।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बचपन में उन्होंने जब इसी क्षेत्र में जन्म लिया था, तब लोगों की सरकार पर निर्भरता शून्य थी। गांव के लोग मिलकर अपने सारे कार्य सम्पन्न करते थे। यहां तक कि गांव की सड़क भी गांव के लोग ही मिलकर बना लेते थे। आज सरकार और जनप्रतिनिधियों के स्तर पर संवाद बढ़ा है, लेकिन गांवों की निर्भरता सरकार पर ज्यादा हो गयी है। यह प्रवृत्ति हमारे समय में नहीं थी। तब भी जीवन खुशहाल था। लोग मिलकर रहते थे। वातावरण सौहार्दपूर्ण था। वह समय वास्तव में स्वर्णिम था।
आज हम आपस में लड़ाई, भाई-भाई में विवाद तथा पारिवारिक कलह देखते हैं। यह विकास नहीं है। यह भौतिकता से उपजी नकारात्मकता है, जो व्यक्ति को दुर्गति की ओर ले जा रही है। हमें इससे बचना होगा। इसके लिए अपने शिक्षण केन्द्रों को मजबूत करना होगा। हमारे शिक्षकों को मेहनत करनी होगी तथा सरकार के साथ समन्वय कर हर कार्यक्रम को लागू करने के अभियान से साथ जुड़ना पड़ेगा। प्रयास करने से सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है। उत्तराखण्ड के पास अच्छा करने के बहुत अवसर हैं। राज्य अच्छी दिशा में आगे बढ़ा है। आने वाले समय में अनेक अवसर आप सबको प्राप्त होंगे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वह आज से लगभग 45 वर्ष पहले यहां आये थे। उस समय इस क्षेत्र में मेला लगा था। तब कॉलेज भवन काफी जर्जर था। आदित्य बिरला ग्रुप ने उत्तराखण्ड सरकार के साथ मिलकर कॉलेज के नवीन भवन के निर्माण को पूर्ण किया। अब इसमें और अच्छी शिक्षा मिले, यह हमारा संकल्प होना चाहिए। हमें बच्चों को प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना होगा। आज आपके लिए शिक्षा आसान हो गई है। हम भी आई0आई0टी0, जे0ई0ई0, नीट तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बच्चों को तैयार कर सकते हैं। निर्धारित समय तक विद्यालय के उपयोग के बाद भी विद्यालय भवन का उपयोग हो। उसमें कुछ विशेष कक्षाएं चलायी जाएं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हमने उत्तर प्रदेश में अभ्युदय कोचिंग का संचालन किया है। कोरोना महामारी के समय हमारे सामने दो चुनौतियां आयी थीं। अन्य राज्यों में कार्य कर रहे उत्तर प्रदेश के कामगार और श्रमिक बड़े पैमाने पर राज्य में वापस आये। दूसरी ओर प्रदेश के जो बच्चे आई0आई0टी0, जे0ई0ई0 और नीट की तैयारी करने के लिए कोटा तथा अन्य जगहों पर गए हुए, उन बच्चों को वापस लाने की चुनौती भी थी।
हमने उत्तर प्रदेश से लगभग 500 बसों के माध्यम से उन बच्चों को वापस लाने की व्यवस्था की। इनमें उत्तराखण्ड के बच्चे भी सम्मिलित थे। हमने उत्तराखण्ड के बच्चों को देहरादून और हल्द्वानी पहुंचाने का काम किया था। उस समय हमने बच्चों की प्रतियोगी परीक्षाआें की तैयारी के लिए अभ्युदय कोचिंग का संचालन प्रारम्भ किया था। यह कोचिंग फिजिकल और वर्चुअल दोनों माध्यमों से थी। इनमें आई0ए0एस0, आई0पी0एस0, डॉक्टर के रूप में नवनियुक्त लोग अपना समय अध्यापन के लिए देते हैं। उत्तर प्रदेश में अभ्युदय कोचिंग के रूप में बहुत अच्छा कार्य हो रहा है। इसके अच्छे परिणाम आ रहे हैं। इसी प्रकार यह इण्टर कॉलेज सरकार की मदद से यह कार्य कर सकते हैं। कॉलेज के शिक्षक भी अपने स्तर पर उन बच्चों को तैयार कर सकते हैं तथा कम्पटीशन के योग्य बना सकते हैं। हमें इस दिशा में आगे बढ़ना होगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हमें पाठ्यक्रम में भी कुछ नयापन करना चाहिए। यमकेश्वर महादेव का बहुत अच्छा मन्दिर है। यहां पर पर्यटन की सम्भावनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में विद्यालय को स्वयं को जोड़ना चाहिए। इसी प्रकार बागवानी, सब्जी की अच्छी खेती तथा ऑर्गेनिक फसलों के क्षेत्र में लोगों को तैयार करना चाहिए। यहां का जल प्राकृतिक और शुद्ध है। इस शुद्धता की कीमत हमें समझनी होगी। इस दिशा में नये प्रयासों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। हमारे यह कार्य लोगों के लिए एक प्रेरणा होंगे। इस प्रेरणा का केन्द्रबिन्दु हमारे शिक्षण संस्थानों को बनना पड़ेगा।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि ‘विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं’ अर्थात विद्या मनुष्य का सबसे बड़ा आभूषण है। शिक्षा में वह शक्ति है, जो व्यक्ति के जीवन को दिशा तथा समाज को संस्कार देती है और राष्ट्र के भविष्य को सशक्त बनाती है। शिक्षा के महत्व को समझते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी देश में नई शिक्षा नीति लेकर आए। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में हमारी सरकार प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक, व्यावहारिक एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए निरन्तर प्रयास कर रही है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी सनातन संस्कृति के रक्षक हैं। वह इसी भूमि में पैदा हुए हैं तथा उनके हृदय में देवभूमि उत्तराखण्ड के प्रति विशेष लगाव है। संन्यास, साधना और राष्ट्र सेवा का अद्भुत समन्वय योगी जी के व्यक्तित्व में दिखाई देता है। यह उन्हें एक साधारण राजनेता से कहीं ऊपर एक राष्ट्र पुरुष के रूप में स्थापित करता है। आज योगी जी ने उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में सुशासन की स्थापना की है। वह आज पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बन चुके हैं। आज उत्तर प्रदेश सुरक्षा, विकास का एक नया मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। उनका सादा जीवन, उच्च विचार और कर्तव्यनिष्ठ कार्यशैली आज की युवा पीढ़ी के लिए आदर्श है।
योगी जी ने भी इसी क्षेत्र में पढ़ाई की है। इसी क्षेत्र में साधारण परिस्थितियों में पैदा होने के बाद उन्होंने असाधारण काम किया है। उन्होंने अपने अनुशासन, परिश्रम और संकल्प से असाधारण ऊंचाइयां प्राप्त की हैं और आज देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा कर रहे हैं। योगी जी का जीवन सभी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हां, कितनी भी कठिन क्यों ना हों, यदि राष्ट्र और समाज के प्रति समर्पण का भाव हो, तो कोई भी कार्य असम्भव नहीं होता है। हर चुनौती एक अवसर बन जाती है।
योगी जी के मन में शुरू से समाज के लिए कुछ करने की अटल भावना थी और यही भावना उन्हें संन्यास, साधना और सेवा के मार्ग पर ले गई। आज वही भावना सुशासन, सुरक्षा और विकास के रूप में करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है। आज भारत ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व में योगी जी को एक ऐसे कर्मयोगी के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने अपने कुशल नेतृत्व व दृढ़ संकल्प से अल्पकाल में ही देश के एक ऐसे राज्य का कायापलट करने का ऐतिहासिक कार्य किया है, जिसकी जनसंख्या विश्व के बहुत से देशों से अधिक है। वर्ष 2017 में योगी जी के मुख्यमंत्री बनने से पहले उत्तर प्रदेश को बीमारू प्रदेश के रूप में देखा जाता था। आज उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश उत्तम प्रदेश बनकर देश के विकास की अग्रिम पंक्ति में खड़ा है।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विद्यार्थी अपने जीवन में बड़े सपने देखें और उन सपनों को पूरा करने के लिए ईमानदारी, अनुशासन और समर्पण से काम करें। जिस क्षेत्र में योगी आदित्यनाथ जी जैसे महान व्यक्तित्व ने पढ़ाई की हो, उस क्षेत्र का प्रत्येक विद्यालय तथा प्रत्येक छात्र असाधारण बनने की क्षमता रखता है। योगी आदित्यनाथ जी का आगमन हम सभी में शिक्षा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण के प्रति नई चेतना का संचार करेगा।
इस अवसर पर उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, उत्तराखण्ड के विद्यालयी शिक्षा (बेसिक एवं माध्यमिक) मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, शिक्षकगण तथा विद्यार्थी उपस्थित थे।
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