उतरौला बलरामपुर - रमज़ान का मुक़द्दस महीना आज आठवां रोज़ा है।यह बरकतों भरा हुआ महीना है जिसमें अल्लाह, तआला ने ईमान वालों पर रोज़े फ़र्ज़ किए गए हैं ताकि वे तक़वा(परहेज़ गारी) अपनाएं और अपनी जिन्दगी को अल्लाह के हुक्म के मुताबिक़ ढाल सकें। मोहल्ला सुभाष नगर में स्थित नूरी मस्जिद के पेश इमाम मौलाना अजमत अली ने कहा कि रोज़ा इंसान को बुराइयों और गुनाहों से बचाता है। रोज़ा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह अपने नफ़्स पर क़ाबू पाने, सब्र करने और खुद का हिसाब लेने का अभ्यास है। एक मुसलमान सुबह से शाम तक खाने-पीने और ख्वाहिशों से खुद को रोकता है,जो अपने रब के हुक्म की तामील है। रोज़ा इंसान को यह एहसास दिलाता है कि अल्लाह हर हाल मेंउसे सुबह से शाम तक देख रहा है।रोज़े की रूह को समझने के लिए किर दार और आदतों में बदलाव लाना ज़रूरी है। अगर जवान ज़बान झूठ,चुगली और बुरे अल्फाज़ से नहींरुकती तो दूसरों को तकलीफ़ पहुंचाने से बचना चाहि ए। हदीस शरीफ़ में आया है, कि रोज़ा एक ढाल है, जो बुराइयों से बचाता है। जब कोई बन्दा सच्चे दिल सेरोज़ा रखता है तो वह ईमान को मज़बूत करता है और अपनी गुनाहों से दूर रहता है।रमज़ान का महीना हमें सब्र, शुक्र और हमदर्दी का पाठ पढ़ाता है। भूख और प्यास का एहसास लोगों की तकलीफ़ सम झने में मदद करता है। यही एहसास ज़कात, सदका और ज़रूरत मंदों की मदद की तरफ़ प्रेरित करता है,और समाज में भाई चारा को बढ़ाता है।इस मुक़द्दस महीने को सिर्फ एक रस्म न बनाकर अपनी जिन्दगी में असली बद लाव का ज़रिया बनाएं। और नमाज़ की पाबंदी करें, क़ुरआन की तिला वत करें और अपने अख़लाक़ को बेहतर बनाएं।अल्लाह तआला हमें रमज़ान कीबरकतों से फ़ायदा उठाने और सच्चे दिल से रोज़ेरखने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।
हिन्दी संवाद न्यूज से
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उतरौला बलरामपुर।
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