जौनपुर, 25 फरवरी 2026 – जौनपुर जिले के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में मिड-डे मील (पीएम पोषण) योजना के तहत काम करने वाली हजारों रसोइयाओं (मुख्य रूप से महिलाएं) की स्थिति बेहद चिंताजनक है। जिले में करीब 8,462 रसोइयाएं कार्यरत हैं, जो रोजाना बच्चों को पौष्टिक भोजन तैयार कराती हैं। लेकिन इनकी मासिक तनख्वाह अभी भी मात्र ₹2000 है – वह भी कई बार 10 महीने ही मिलती है। महंगाई के इस दौर में इतने कम पैसे में परिवार चलाना, बच्चों की पढ़ाई और घरेलू खर्च संभालना लगभग असंभव हो गया है।

एक रसोइया ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "हम सुबह से दोपहर तक चूल्हे के सामने खड़ी रहती हैं, बच्चों का पेट भरती हैं, लेकिन खुद का पेट खाली रह जाता है। प्रधानाध्यापक या हेडमास्टर से रोज डांट-फटकार मिलती है, 'निकाल देंगे' की धमकी आम है। हमारा कोई अधिकार नहीं, कोई सुरक्षा नहीं। हम स्थायी नौकरी चाहती हैं, ताकि पेंशन मिले, छुट्टी मिले और सम्मान मिले।"

जौनपुर में परिषदीय स्कूलों की संख्या सैकड़ों में है (प्रदेश स्तर पर 1.4 लाख+ स्कूलों के आंकड़े के अनुपात में जिले में भी हजारों बच्चे लाभान्वित होते हैं)। ये रसोइयाएं सिर्फ खाना बनाने वाली नहीं, बल्कि जिले के लाखों बच्चों की सेहत और स्कूल उपस्थिति की आधारशिला हैं। लेकिन कम वेतन और असुरक्षा के कारण योजना की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।

मुख्य मांगें क्या हैं?

मानदेय में तत्काल वृद्धि (कम से कम ₹5000-10000 या न्यूनतम मजदूरी के बराबर)

साल भर (12 महीने) भुगतान सुनिश्चित करना

नौकरी को परमानेंट बनाना, पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और अन्य सुविधाएं

प्रधानाध्यापकों द्वारा प्रताड़ना और धमकियों पर सख्त रोक, शिकायत निवारण तंत्र

राष्ट्रीय स्तर पर 22 राज्यों (उत्तर प्रदेश सहित) ने केंद्र से मानदेय बढ़ाने की मांग की है – सुझाव ₹2500 से ₹10000 तक के हैं। छत्तीसगढ़ में रसोइयाएं 50+ दिनों से धरना दे रही हैं और ₹66 प्रतिदिन से बढ़ाकर ₹350-400 की मांग कर रही हैं। बिहार ने हाल ही में मानदेय दोगुना किया। उत्तर प्रदेश में भी मऊ, अन्य जिलों में प्रदर्शन हो चुके हैं, और जौनपुर की रसोइयाएं भी अब आवाज उठाने को तैयार हैं।

उत्तर प्रदेश मिड-डे मील प्राधिकरण की वेबसाइट पर 2022 के आदेश में मानदेय वृद्धि और ड्रेस का जिक्र है, लेकिन जौनपुर सहित ज्यादातर जगहों पर अभी भी ₹2000 ही मिल रहा है। केंद्र की PM POSHAN योजना में बेसिक मानदेय 2009 से ₹1000 फिक्स है, जबकि महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है।

बच्चों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा

ये बहनें-माताएं बच्चों को पोषण देती हैं, लेकिन खुद उपेक्षित हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रसोइयाओं को सम्मानजनक वेतन और स्थायी नौकरी मिले, तो वे और बेहतर काम कर सकेंगी, जिससे जौनपुर के बच्चों का स्वास्थ्य और शिक्षा मजबूत होगी।

सरकार से अपील

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी! जौनपुर की इन मेहनतकश महिलाओं की सुनिए। उनकी सैलरी बढ़ाइए, नौकरी स्थायी कीजिए। यह कदम न केवल उनके परिवारों को राहत देगा, बल्कि जिले की शिक्षा क्रांति को नई ऊर्जा देगा। क्या जौनपुर से भी कोई बड़ा आंदोलन शुरू होगा? समय आ गया है बदलाव का!

Post a Comment

If you have any doubts, please let me know

और नया पुराने