उतरौला बलरामपुर - आदर्श नगर पालिका परिषद उतरौला में स्थित प्रमुख चौराहे डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी चौराहे पर प्रति दिन बिगड़ती यातायात व्यवस्था ने स्थानीय जन जीवन को प्रभावित कर रहा है। सुबह-शाम के समय अक्सर चौराहा पर जाम का गढ़ बन जाता है, जिससे राह गीरों, दैनिक आवागमन करने वालों और विशेष कर स्कूल जाने-वाले बच्चों को भारीतकलीफ का सामना करना पड़ रहा है।स्थानीय लोगों ने बताया कि चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस कर्मी तथा कांस्टेबल तैनात दिखाई तो देते हैं, लेकिन उसके बावजूद भी स्थिति नियंत्रण से बाहर होती रहती है। प्रमुख समस्या रॉन्ग-टर्न और नियमों का उल्लंघन है, बहुत से चार-पहिया व दो-पहिया वाहन बाएँ साइड से होकर जाने के बजाय चौराहे परदाहिने साइड से पार करने की कोशिश करते हैं,जिससे सड़क पर अनियमित भीड़ बन जाती है,और छोटा-सा जाम भीजल्दी बड़े आवागमन-अवरोध में बदल जाता है। स्कूल जाने-वाले बच्चों की समस्याएँ विशेष रूप से चिन्ता जनक हैं। बच्चों के माता- पिता का कहना है, कि बच्चे अक्सर देर से पहुँचते हैं, सुरक्षा भी खतरे में बनी रहती है,और दुर्घट ना का जोखिम बढ़ जाता है। कई स्कूल बसें और निजी वाहन भी चौराहे पर फँसकर समय पर स्कूल पहुँचाने में असमर्थ रहते हैं। दुकान दारों और व्यव सायियों ने बताया कि जाम के चलते कारोबार पर भी प्रभावित हो रहा है, तथा ग्राहकों की आवा जाही घट रही है।
रॉन्ग-टर्न व ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन, वाहन चालक चौराहे के दाहिने हिस्से को शार्ट कट मानकर प्रयोग कर रहे हैं। अपर्याप्त मार्ग- निर्देश और स्पष्ट साइन बोर्ड का अभाव उचित चिन्ह-लेखन व लेन- मार्किंग न होने से यात्रि यों में भ्रम उत्पन्न होता रहता है।पीक-टाइम में वाहनों की अधिकता सुबह-शाम स्कूल और काम काज के समय वाहन घनत्व अधिक रहता है।समन्वयहीन यातायात प्रबन्धन कुछ नागरिकों केअनुसार पुलिस की मौजूदगी होने पर भी उनका समन्वय और दिशा- निर्देश भी प्रभावी तौर पर लागू नहीं हो पाते हैं। सीमित पारगम्यता वाले मार्ग चौक के निकट ही साइड-रोड व दुकानें होने से मार्गों का उपयोग बाधित होता रहता है।राहगीरों व स्थानीय निवासियों ने बताया कि समस्या केवल नेतृत्व-कमी की नहीं, बल्कि नीति और अनुपालन दोनों की ही कमी है। एक स्कूल अभिभावक ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए पहले ही प्राथमि कता होनी चाहिए, निय मित रुप से जाम और लापरवाही के चलते डर लगता है। दुकानदारों ने कहा कि रोजाना के जाम के होने से व्यापार को नुकसान हो रहा है।
पीक-घंटों में चौराहे पर कठोर ट्रैफिक ड्यूटी तथा मोबाइल-नियंत्रण (वेरीफाइड टीम) को बढ़ाया जाए।रॉन्ग-टर्न रोकने हेतु फिजिकल बैरियर/कंक्रीट सेन्ट्रल व बॉलार्ड लगाए जाएँ ताकि चालकअनधिकृत मार्ग न बना सकें। स्पष्ट लेन-मार्किंग, ‘नो-राइट/नो-LEFT TURN’ साइन बोर्ड और फ्लैग मैन निर्देशित करें।स्कूलों के लिए स्टैजरड टाइमिंग का समन्वय और स्कूल-बस रूट्स में प्राथमिकता देने की व्यवस्था करें।चौराहे पर ट्रैफिक सिग्नल साइ कल फेसिंग या समय- आधारित संकेतक लगवाना स्थाई रूप से जरुरी है। अस्थायी सी सी टी वी (CCTV) डेविडीआर कैमरे से नियम उल्लंघन पर चालान व पखवाड़ावार पकड़ों का अभियान।
चौराहे के पास वाहन पार्किंग व स्टैंडिंग नियम तय कर अव्यवस्था कम करना। चौराहे के आस पास वैकल्पिक मार्गों का निर्माण यामहत्वपूर्ण सड़क-नवीनी करण योजना।सार्वजनिक जागरूकता अभियान स्कूल-स्तर पर बच्चों और अभिभावकों को यातायात नियमों का प्रशिक्षण।स्मार्ट-ट्रैफिक समाधान समयानुकूल सिग्नलिंग व ट्रैफिक फ्लो-मॉनिटरिंग।
स्थानीय लोग और अभि भावक प्रशासन से शीघ्र कदम उठाने काअनुरोध कर रहे हैं, चाहे वह आवागमन के समय स्थाई ट्रैफिक कंट्रोल दल तैनात करना होगा, सिग्नलिंग इंस्टॉल करना हो या रॉन्ग-टर्न रोकने के लिए कड़े प्रबन्ध करना हो तो चौराहे पर स्कूल की उपस्थिति और वार-वॉलेट याता यात को ध्यान में रख कर विशेष रूप से प्राथ मिकता दी जानी चाहिए।
हिन्दी संवाद न्यूज से
असगर अली की खबर
उतरौला बलरामपुर।
एक टिप्पणी भेजें
If you have any doubts, please let me know