पितरों का और जीवित माता पिता का क्या सम्बन्ध है दीपावली और नरक चतुर्दशी से  - जानते हैं वास्तु शास्त्री डॉ सुमित्रा अग्रवाल से 

सेलिब्रिटी वास्तु शास्त्री डॉ सुमित्रा अग्रवाल, कोलकाता 
इंटरनेशनल वास्तु अकादमी सिटी प्रेजिडेंट कोलकाता 

नरक चतुर्दशी से जुडी ४ महत्वपूर्ण बिंदु है जिसका धयान रखना चाहिए। 
१।  दिवाली तीन दिनों तक मनाये। माता लक्ष्मी को तो मनाये साथ ही उनकी बहन दरिद्रा को भी उचित प्रसाद भोग लगाएं। 
२।  कृष्णा भगवन की आराधना करें और श्रीमद्भागवत गीता पढ़ें। 
३। यमराज को संतुष्ट रखखे। देवताओं का पूजन करके सायंकाल यमराज को दीपदान करने का विधान है।
४।  जीवित माता पिता और पितरो के लिए ये जरूर करे - यमराज देव भी हैं और पितर भी, अतः जिनके माता-पिता जीवित हों, उनको भी नरक चतुर्दशी के दिन जलांजलि अर्पित कर यमराज और भीष्म का तर्पण करना चाहिए। ऐसा करने से हम उनको नरक की यातनाओ से बचा सकते हैं। तर्पण-कर्म सभी पुरुषों को करना चाहिए।

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