नर्सिंग एवं पैरामेडिकल प्रशिक्षण में व्यापक सुधार के लिए शुरू होगा "मिशन


निरामयाः"


नर्सिंग एवं पैरामेडिकल संस्थानों में गुणवत्ता सुधार और सेवायोजन के लिए


मुख्यमंत्री की बड़ी पहल


नर्सिंग सेक्टर में बेहतर करियर के लिए माध्यमिक विद्यालयों में दी जाए


जानकारी: मुख्यमंत्री


पैरामेडिकल कॉलेजों के शिक्षकों का आधार सत्यापन कर पोर्टल पर जारी करें


विवरण: मुख्यमंत्री


मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश, अधोमानक संस्थानों को नहीं मिलेगी मान्यता


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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने शुक्रवार को प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों

की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए शैक्षिक गुणवत्ता सुधार के सम्बंध में

विविध दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री जी ने प्रशिक्षित युवाओं के बेहतर

सेवायोजन के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग का अधिकारियों का मार्गदर्शन भी

किया।

नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ स्वास्थ्य एवं चिकित्सा व्यवस्था की रीढ़ हैं।

कोरोना काल में हम सभी ने इनके व्यापक महत्व को देखा-समझा है। इस क्षेत्र में

बेहतर कॅरियर की अपार संभावनाएं हैं। भविष्य की जरूरतों के दृष्टिगत नर्सिंग

एवं पैरामेडिकल प्रशिक्षण में व्यापक परिवर्तन की आवश्यकता है। ऐसे में इस

महत्वपूर्ण कार्य को अभियान के रूप में लेते हुए "मिशन निरामयाः' के शुभारंभ

की तैयारी करें।

नर्सिंग और पैरामेडिकल संस्थानों को मान्यता दिए जाने से पहले

निर्धारित मानकों का कड़ाई से अनुपालन किया जाना सुनिश्चित करें। मान्यता

तभी दी जाए, जब शिक्षक पर्याप्त हों, संस्थान में मानक के अनुरूप इंफ्रास्ट्रक्चर

हो। अधोमानक संस्थानों को कतई मान्यता न दी जाए। प्रदेश के सभी

नर्सिंग/पैरामेडिकल संस्थानों में सेवारत शिक्षकों का आधार सत्यापन करते हुए

इनका विवरण पोर्टल भी उपलब्ध कराया जाए।

संस्थानों में दाखिला परीक्षा की शुचिता पर विशेष ध्यान दें। ऐसी

व्यवस्था हो कि परीक्षाओं में कक्ष निरीक्षक दूसरे संस्थान से हों। परीक्षाओं की


सीसीटीवी से निगरानी भी की जानी चाहिए। इस दिशा में बेहतर कार्ययोजना

के साथ काम किया जाए।

प्रदेश के कई संस्थान अच्छा कार्य कर रहे हैं। इनमें निजी क्षेत्र के संस्थान

भी शामिल हैं। इन बेस्ट प्रैक्टिसेज को अन्य संस्थानों में भी लागू किया जाना

चाहिए। इसके लिए मेंटॉर-मेंटी मॉडल को अपनाया जाना चाहिए।

बेहतर प्रशिक्षण के साथ-साथ हमें बेहतर सेवायोजन के लिए भी

सुनियोजित प्रयास करना होगा। इसके लिए निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठित हॉस्पिटल से

संवाद कर नीति तय की जाए। नर्सिंग का प्रशिक्षण ले रहे युवाओं के लिए

प्रैक्टिकल नॉलेज बहुत आवश्यक है।

नर्सिंग और पैरामेडिकल सेक्टर में कॅरियर की बेहतर संभावनाओं के बारे

में अधिकाधिक युवाओं को जागरूक किया जाने की जरूरत है। इसके लिए

माध्यमिक विद्यालयों का सहयोग लिया जाना बेहतर होगा। चिकित्सा शिक्षा

और माध्यमिक शिक्षा विभाग इस संबंध में परस्पर समन्वय के साथ कार्य करें।

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