प्रयागराज में दोनों नदियों में उफान है। खतरे के निशान के करीब पानी पहुंच रहा है। संगम आरती स्‍थल क्षेत्र के अक्षयवट मार्ग और काली सड़क के निकट गंगा-यमुना का पानी पहुंच चुका है। संगम आरती स्थल पानी में डूब गया है और दशाश्वमेघ मार्ग भी डूबने के कगार पर है। रविवार को कानपुर बैराज से डेढ़ लाख से अधिक क्यूसिक पानी छोड़े जाने के कारण सोमवार शाम तक नदियों के जलस्तर में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। गंगा और यमुना नदियों का प्रयागराज में खतरे का निशान 84.73 मीटर है पहाड़ी और मैदानी इलाकों में हो रही बारिश से दोनों नदियां उफान पर हैं। इसका असर प्रयागराज में भी नजर आने लगा है। यहां गंगा-यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ा और अक्षयवट मार्ग के साथ ही काली सड़क पर पानी पहुंच गया। यह देखकर घाटिए और तीर्थ पुरोहित पीछे हट गए। दुकानदारों को भी हटाया गया। रविवार शाम तक पानी से संगम आरती स्थल डूब गया। गंगा-यमुना नदियों का पानी तीव्र गति से बढऩे की वजह से बाढ़ राहत दल पीएसी, एसडीआरएफ और जल पुलिस की टीम सक्रिय हो गई है। दशाश्वमेघ घाट पर एसडीआरएफ की टीम को तैनात कर दिया गया है। जहां कटान हो रहा है, वहां पर जल पुलिस के जवान और गोताखोरों को तैनात किया गया है। नाविकों को सक्रिय करते हुए किसी भी स्नानार्थी को गहरे पानी की तरफ न ले जाने की सलाह दी गई। सिंचाई विभाग बाढ़ कंट्रोल रूम के मुताबिक रविवार रात आठ बजे तक फाफामऊ में 79.67 मीटर, छतनाग में 78.44 मीटर और नैनी में 78.88 मीटर जलस्तर दर्ज किया गया। जबकि शनिवार रात आठ बजे तक फाफामऊ में 79.08 मीटर, छतनाग में 77.15 मीटर और नैनी में 77.78 मीटर जलस्तर था गंगा-यमुना में पानी बढऩे के कारण कछारी इलाकों में पानी तेजी से दाखिल हो रहा है। इसलिए बाढ़ संभावित क्षेत्रों की सूची तैयार कर प्रशासनिक अधिकारियों ने इन इलाकों का दौरा किया। सलोरी, बघाड़ा, फाफामऊ, महमदपुर समेत अन्य इलाकों में अधिकारी पहुंचे। यहां रहने वाले लोगों से सक्रिय रहने को कहा यमुना के किनारे झुग्गी झोपड़ी और तिरपाल बनाकर दर्जनों परिवार रहते हैं। रविवार को बाढ़ राहत दल पीएसी के जवान पुराने यमुना पुल, करैलाबाग समेत कई स्थानों पर पहुंचे। यहां रहने वाले लोगों से जल्द-से-जल्द हटने को कहा 


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