आईसीएआर–सीआईआरजी की Goat-Synch® प्रौद्योगिकी को मिला ‘सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकी’ सम्मान
सीआईआरजी की 06 प्रौद्योगिकियाँ आईसीएआर द्वारा प्रमाणित; 03 प्रौद्योगिकियों का उद्योगों को सफलतापूर्वक व्यावसायीकरण
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), नई दिल्ली के 98वें स्थापना दिवस के अवसर पर आईसीएआर–केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी), मखदूम, फरह, मथुरा की कुल 06 प्रौद्योगिकियों को आईसीएआर द्वारा प्रमाणित किया गया । इनमें से Goat-Synch® अन्तः योनि स्पंज प्रौद्योगिकी को सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकियों में स्थान प्राप्त होना संस्थान के लिए गौरव का विषय है । इस उपलब्धि से केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान की वैज्ञानिक उत्कृष्टता एवं बकरी पालन क्षेत्र में तकनीकी नवाचार को नई पहचान मिली है ।
यह गरिमामयी समारोह केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थिति में आयोजित हुआ । इस अवसर पर केन्द्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह, राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी तथा श्री राम नाथ ठाकुर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे ।
Goat-Synch® प्रौद्योगिकी को वयस्क मादा बकरियों में मद उद्दीपन एवं समकालीकरण (Estrus Induction and Synchronization) के लिए विकसित किया गया है । इस तकनीक के माध्यम से बकरियों को पूर्व-निर्धारित समयावधि में हीट में लाकर नियोजित प्रजनन एवं अनुकूल मौसम में बच्चों के जन्म को सुनिश्चित करने में सहायता मिलती है । यह तकनीक प्रजनन दक्षता बढ़ाने, दो ब्यांतों के बीच की अवधि कम करने, श्रम एवं संसाधनों की बचत करने तथा समान आयु वर्ग के बकरों/बकरियों के समूह तैयार करने में उपयोगी है ।
इस अत्यंत उपयोगी प्रौद्योगिकी को संस्थान के वैज्ञानिकों डॉ. वाई. के. सोनी, डॉ. एस. डी. खर्चे, डॉ. एस. पी. सिंह, डॉ. रवि रंजन, डॉ. ए. के. गोयल एवं डॉ. एम. के. सिंह द्वारा संस्थान के निदेशक डॉ. मनीष कुमार चेटली के मार्गदर्शन में विकसित किया गया है ।
सीआईआरजी द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों को प्रयोगशाला एवं अनुसंधान तक सीमित न रखते हुए 03 विभिन्न उद्योगों को सफलतापूर्वक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं व्यावसायीकरण किया जा चुका है । इससे इन तकनीकों का व्यापक स्तर पर उत्पादन एवं उपयोग संभव होगा तथा इनके लाभ सीधे किसानों एवं बकरी पालकों तक पहुँच सकेंगे ।
संस्थान की शेष एवं अन्य उपलब्ध प्रौद्योगिकियों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के इच्छुक उद्योग, स्टार्टअप, उद्यमी एवं निजी क्षेत्र की कंपनियाँ सीआईआरजी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध प्रौद्योगिकी विवरण का अवलोकन कर सकती हैं तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं व्यावसायीकरण के लिए संस्थान से संपर्क कर सकती हैं ।
सीआईआरजी की ये प्रौद्योगिकियाँ देश में वैज्ञानिक बकरी पालन को बढ़ावा देने, उत्पादकता एवं प्रजनन दक्षता में सुधार करने तथा किसानों एवं बकरी पालकों की आय और आजीविका को सुदृढ़ करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगी । संस्थान का उद्देश्य उन्नत वैज्ञानिक तकनीकों को अधिक से अधिक किसानों एवं बकरी पालकों तक पहुँचाकर बकरी पालन को लाभकारी, टिकाऊ एवं रोजगारपरक व्यवसाय के रूप में विकसित करना है ।



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