अयोध्या धाम के संत श्री पूजनीय कौशल किशोर फलाहारी जीमहराज :
पुण्यतिथ विशेष....
  अयोध्या की संत परंपरा के तेजस्वी ध्रुवतारा।फालहारी जी महराज 
- डॉ श्री वत्साचार्य जी महाराज   (डॉ अशोक कुमार पाण्डेय की कलम से..संत फलाहारी जी महराज 




 
भारतीय संस्कृति की आधारभूमि सदैव से तप, त्याग, सेवा और साधना की दिव्य परंपराओं से अनुप्राणित रही है। विशेषतः अयोध्या, जो भगवान श्रीराम की जन्मभूमि के रूप में विश्वविख्यात है, अनादिकाल से संत-महात्माओं की तपोभूमि रही है। इसी पुण्यभूमि ने अनेक ऐसे महापुरुषों को जन्म दिया, जिन्होंने अपने जीवन से धर्म, समाज और संस्कृति के उत्कर्ष का मार्ग प्रशस्त किया। इन्हीं महान संतों की श्रेणी में श्री राजगोपाल मंदिर के पूर्व महंत एवं श्री राजगोपाल संस्कृत महाविद्यालय के अध्यक्ष, पूजनीय श्री कौशल किशोर फलाहारी जी का नाम अत्यंत आदर और श्रद्धा के साथ स्मरणीय है। वे न केवल एक महान संत थे, अपितु अयोध्या की उदारता, ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना के सजीव प्रतीक भी थे।

श्री कौशल किशोर फलाहारी जी का व्यक्तित्व बहुआयामी एवं तेजस्वी था। उनका जीवन अत्यंत सादगीपूर्ण, किंतु आध्यात्मिक गरिमा से परिपूर्ण था। उन्होंने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण धर्म और मानवता की सेवा में समर्पित कर दिया। ‘फलाहारी’ उपाधि उनके तपस्वी जीवन की साक्षी है, जो उनके संयम, त्याग और कठोर साधना का परिचायक है। वे न केवल आहार-विहार में संयमी थे, बल्कि अपने विचारों और आचरण में भी अत्यंत शुद्ध एवं सात्त्विक थे।
उनका जीवन भारतीय सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों—सत्य, अहिंसा, करुणा और सेवा—का जीवंत उदाहरण था। वे सदैव समाज के प्रत्येक वर्ग के प्रति समदृष्टि रखते थे। उनके लिए न कोई छोटा था, न बड़ा; न कोई धनी, न निर्धन। वे सभी को एक समान स्नेह और सम्मान प्रदान करते थे। यही कारण था कि उनके सान्निध्य में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति आत्मिक शांति और प्रेरणा का अनुभव करता था।
श्री राजगोपाल मंदिर के महंत के रूप में उन्होंने न केवल मंदिर की धार्मिक परंपराओं का संरक्षण किया, बल्कि उसे आध्यात्मिक चेतना का केंद्र भी बनाया। उनके नेतृत्व में मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं रहा, बल्कि वह समाज के नैतिक और सांस्कृतिक उत्थान का केंद्र बन गया। वे नियमित रूप से प्रवचन, सत्संग और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन करते थे, जिससे जनमानस में धर्म के प्रति जागरूकता और आस्था का संचार होता था।
इसके अतिरिक्त, श्री राजगोपाल संस्कृत महाविद्यालय के अध्यक्ष के रूप में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। वे भली-भांति जानते थे कि किसी भी संस्कृति की आत्मा उसकी भाषा और शिक्षा में निहित होती है। इसलिए उन्होंने संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार और वेद-शास्त्रों के अध्ययन को विशेष प्रोत्साहन दिया। उनके प्रयासों से महाविद्यालय ज्ञान का एक उत्कृष्ट केंद्र बन गया, जहाँ विद्यार्थियों को न केवल शास्त्रीय ज्ञान प्राप्त होता था, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों का भी संस्कार मिलता था।
उनकी उदारता और करुणा अद्वितीय थी। वे सदैव समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए तत्पर रहते थे। अनेक बार उन्होंने अपने निजी संसाधनों का उपयोग कर जरूरतमंदों की सहायता की। उनके लिए सेवा ही सर्वोच्च धर्म था। वे मानते थे कि सच्ची पूजा वही है, जिसमें मानवता की सेवा निहित हो।
उनका व्यक्तित्व अत्यंत प्रभावशाली और प्रेरणादायी था। उनकी वाणी में ऐसी मधुरता और गाम्भीर्य था कि सुनने वाला स्वतः ही उनकी ओर आकर्षित हो जाता था। उनके प्रवचनों में गूढ़ दार्शनिक विचारों के साथ-साथ जीवनोपयोगी शिक्षाएँ भी होती थीं। वे सरल भाषा में गहन आध्यात्मिक सत्य को इस प्रकार प्रस्तुत करते थे कि सामान्य जन भी उसे सहज रूप से समझ सके।
श्री कौशल किशोर फलाहारी जी का जीवन अनुशासन और समर्पण का आदर्श था। वे प्रतिदिन नियमित रूप से साधना, जप, ध्यान और स्वाध्याय में लीन रहते थे। उनके दिनचर्या का प्रत्येक क्षण नियोजित और उद्देश्यपूर्ण होता था। उन्होंने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि आत्मिक उन्नति के लिए अनुशासन और निरंतर अभ्यास अत्यंत आवश्यक है।
अयोध्या की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा को समृद्ध बनाने में उनका योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने न केवल अपनी तपस्या और साधना से इस पवित्र भूमि की गरिमा को बढ़ाया, बल्कि अपने कार्यों और विचारों से समाज को एक नई दिशा भी प्रदान की। वे वास्तव में अयोध्या के गौरव थे—एक ऐसे संत, जिनकी उदारता, करुणा और ज्ञान की आभा आज भी जनमानस को आलोकित कर रही है।
उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चा संत वही है, जो अपने जीवन को केवल आत्मकल्याण तक सीमित न रखकर, समाज के कल्याण के लिए समर्पित कर दे। उन्होंने यह भी दर्शाया कि धर्म केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि वह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में नैतिकता, सेवा और सद्भावना के रूप में प्रकट होता है।
अंततः, श्री पूजनीय कौशल किशोर फलाहारी जी का जीवन एक प्रेरणास्रोत है, जो हमें सत्य, सेवा और समर्पण के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व सदैव अयोध्या की संत परंपरा के उज्ज्वल नक्षत्र के रूप में स्मरणीय रहेगा। उनके द्वारा स्थापित आदर्श आने वाली पीढ़ियों को भी धर्म और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते रहेंगे।

इस प्रकार, वे न केवल एक महान संत थे, बल्कि अयोध्या की आत्मा के साकार स्वरूप थे—उदारता की प्रतिमूर्ति, ज्ञान के दीपस्तंभ और मानवता के सच्चे उपासक रहे।
फलाहारी जी महराज की पुण्यतिथि पर अयोध्या स्थित श्री राजगोपाल मंदिर मे भव्य कार्यक्रम का आयोजन एवं भण्डारे का  आयोजन किया गया। 
कार्यक्रम मे देश व प्रदेश के सैकड़ों भक्त स्थानीय नेता, अधिकारी, सहित स्थानीय लोगों ने प्रतिभाग कर फलाहारी जी महराज को नमन किया और भण्डारे मे हिस्सा लिया।

उमेश चन्द्र तिवारी 
9129813351
हिन्दी संवाद न्यूज़ 
उत्तर प्रदेश 

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