मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा है कि वन जीवन का आधार और प्रकृति के सन्तुलन का एक महत्वपूर्ण आयाम प्रस्तुत करता है। यदि वन है, तो जल है, जल और वन है, तो वायु है और अगर वायु है, तो जीवन है। वन के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। प्रदेशवासियों को अन्तरराष्ट्रीय वन दिवस की बधाई और शुभकामनायें देते हुये उन्होंने कहा कि प्रकृति में वृक्ष की महत्ता को सर्वोपरि माना गया है। भारतीय ऋषि परम्परा का कथन है कि ‘दश कूप समा वापी, दशवापी समोहृद्रः, दशहृद समः पुत्रो, दशपुत्रो समो द्रुमः अर्थात दस कुओं के बराबर एक बावड़ी, दस बावड़ियों के बराबर एक तालाब, दस तालाबों के बराबर एक पुत्र और दस पुत्रों के बराबर एक वृक्ष होता है।
मुख्यमंत्री जी आज यहां इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में अन्तरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर अरण्य समागम के अन्तर्गत ‘वन एवं अर्थव्यवस्थायें’ विषयक राष्ट्रीय वानिकी संवाद का उद्घाटन करने के पश्चात अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने वन्य जीव विभाग द्वारा प्रकाशित पीलीभीत टाइगर रिजर्व कॉफी टेबल बुक, सुहेलदेव वन्य जीवन अभ्यारण्य पर आधारित पुस्तक, वन विभाग की ‘09 साल बेमिसाल’ कॉफी टेबल बुक तथा उत्तर प्रदेश में हरियाली के कीर्तिमान विश्व रिकॉर्ड के साथ पुस्तक का विमोचन किया।
मुख्यमंत्री जी ने मानव वन्य-जीव संघर्ष के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले बच्चों, आम जनमानस, सामाजिक संगठनों तथा वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को सम्मानित किया तथा अन्नदाता किसानों को क्रेडिट चेक प्रदान किये। इसके पूर्व, उन्होंने वन एवं वन्य जीव विभाग द्वारा लगायी गयी प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हमारी ऋषि परम्परा का उद्घोष था कि ‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः’ अर्थात धरती हमारी माता है और हम सब इसके पुत्र हैं। माता के प्रति पुत्र का यह दायित्व होता है कि माता के सम्मान, सुरक्षा, संरक्षण में किसी प्रकार की कमी न रहने पाये। दुनिया के प्रत्येक नागरिक को सोचना चाहिये कि धरती माता के लिये उसके स्तर पर किये जाने वाले प्रयासों में कहां चूक हुयी है, जिससे पर्यावरण चक्र में व्यापक बदलाव के चलते ग्लोबल वॉर्मिंग और ग्लोबल कूलिंग जैसी समस्याएं उत्पन्न हुयी हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वैश्विक दृष्टिकोण और थीम को ध्यान में रखते हुये इस वर्ष अन्तरराष्ट्रीय दिवस की थीम ‘फॉरेस्ट एण्ड इकोनॉमीज’ रखी गयी है। यह थीम पारिस्थितिकी सन्तुलन को बनाये रखते हुये, आर्थिक विकास और मानव कल्याण के लिये वनां को बेहतरीन तरीके से आगे बढ़ाने हेतु प्रेरित करती है। हमें वर्तमान चुनौतियों के अनुरूप अपनी कार्ययोजना प्रस्तुत करनी होगी।
मुख्यमत्री जी ने कहा कि विगत 09 वर्षों में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में प्रदेश में वनाच्छादन को बढ़ाने में सफलता प्राप्त हुयी है। इस प्रयास में हमें सफलता तब प्राप्त हुयी, जब जनान्दोलन बनाने का कार्य किया गया। किसी अभियान के जनान्दोलन बनने में सफलता तब प्राप्त होती है, जब समाज उस अभियान को लीड करता है और सरकार उसका सपोर्ट करती है। विभाग का कार्य निगरानी करना होता है। इस अभियान में विगत 09 वर्षों में सफलता इसलिये प्राप्त हुयी, क्योंकि समाज आगे था और सरकार सहयोगी के रूप में अपना सम्बल प्रदान कर रही थी। सरकार वनाच्छादन वृद्धि की बाधाओं को दूर करने में सहयोगी की भूमिका निभा रही थी।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पहले वृक्षारोपण के लिये निजी नर्सरियों व निजी उद्यानों पर निर्भर रहना पड़ता था। गत वर्ष प्रदेश में वन महोत्सव के अवसर पर 37 करोड़ वृक्ष एक ही दिन में लगाये गये। इस कार्य के लिये हमारे पास लगभग 50 करोड़ 08 से 10 फीट लम्बे व अच्छे पेड़ उपलब्ध थे। इस वर्ष प्रदेश में एक दिन में 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है, जिसका इस पौधरोपण कार्य के आगामी एक माह में 40 से 45 करोड़ तक पहुंचने की सम्भावना है। प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अन्तर्गत वर्तमान में 50 करोड़ पौधे पौधरोपण के लिये उपलब्ध हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश पिछले कुछ वर्षों से इन्फ्रास्ट्रक्चर पर 02 लाख करोड़ रुपये का कैपिटल एक्सपेंडीचर कर रहा है। यह धनराशि देश में सर्वाधिक है। प्रदेश के बढ़ते इन्फ्रास्ट्रक्चर के चलते पेड़ों की शिफ्टिंग व कटिंग की आवश्यकता पड़ी। इन चुनौतियों के बावजूद उत्तर प्रदेश के वनाच्छादन में वृद्धि सुखद अनुभूति करा रही है। हमने विगत 09 वर्षों में 242 करोड़ वृक्षारोपण करने में सफलता प्राप्त की है। वर्तमान में प्रदेश का वनाच्छादन लगभग 10 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। हमें प्रदेश का वनाच्छादन लगभग 16 से 17 प्रतिशत तक बढ़ाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना होगा। रामसर साइट पर्यटन, वन्य जीवों तथा पक्षियों की दृष्टि से महत्वपूर्ण होती है। वर्ष 2017 में प्रदेश में केवल 01 रामसर साइट थी, जिनकी संख्या बढ़कर 11 हो चुकी है। प्रदेश सरकार इनकी संख्या 100 तक पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जल संरक्षण की दृष्टि से रामसर साइट की बड़ी भूमिका हो सकती है। विभाग के स्तर पर इस दिशा में अनेक प्रयास किये गये हैं। अटल वन, एकलव्य वन, त्रिवेणी वन, ऑक्सी वन, सिटी वन की स्थापना इसका उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। गंगा, यमुना और सरयू जैसी पवित्र नदियों के किनारे व्यापक वृक्षारोपण के कार्यक्रम चले हैं। एक्सप्रेस-वे और राजमार्गों के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर उपयुक्त प्रजाति के वृक्षों का रोपण कार्यक्रम आगे बढ़ा है। प्रदेश के सभी जनपदों में कम से कम एक नदी के पुनरुद्धार का कार्य सफलतापूर्वक किया गया है। जौनपुर में पीली नदी का पुनरुद्धार जनपद की सफलता की नई कहानी है। आज हम लोगों ने कार्बन फाइनेंस प्रोजेक्ट के अन्तर्गत कार्बन क्रेडिट के लिए कृषकों को धनराशि वितरित की। उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने इस दिशा में अपने कार्यक्रम को आगे बढ़ाया है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सरकार ने दुधवा नेशनल पार्क में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने का कार्यक्रम आगे बढ़ाया है। लखनऊ, बरेली आदि जनपदों से दुधवा की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया गया है। इस वर्ष की थीम के अनुसार प्रदेश में अब तक लगभग 2,467 ग्रीन इकोनमी मॉडल के वन आधारित उद्योगों की स्थापना की जा चुकी है। गोरखपुर प्राणि उद्यान में प्रारम्भ में टाइगर नहीं था। अब वहां कई टाइगर होने से प्रतिदिन लगभग 08-10 हजार लोग देखने आते हैं। टाइगर को रखना एक चुनौती है। कभी-कभी मानव वन्य-जीव संघर्ष के मामले भी आते हैं। उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने मानव वन्य-जीव संघर्ष को आपदा की श्रेणी में सम्मिलित कर प्रभावितों को सहायता देना प्रारम्भ किया। नेपाल में व्यापक पैमाने पर वृक्ष काटे जाने और अवैध कटान के कारण वहां के वन्य जीव उत्तर प्रदेश में दुधवा और आसपास के क्षेत्र में आए हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कोई वन्य जीव अचानक हमला नहीं करता। अगर उसके छोटे बच्चों के समीप कोई व्यक्ति जाता है अथवा उसके क्षेत्रों का जबरन अतिक्रमण करने का प्रयास करता है या उसे लगे कि कोई व्यक्ति उस पर हमला कर सकता है, तभी वह हमला करता है। अगर हम वन्य जीव की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करेंगे और उनका दायरा सीमित करने का प्रयास करेंगे, तो वह स्वाभाविक रूप से हिंसक होंगे। गत वर्ष सीतापुर में लगभग 07-08 वर्ष का एक बाघ आया था। वह कई दिनों तक वहां रहा। इस दौरान उसने एक भी मानव को क्षति नहीं पहुंचाई। उसको पकड़ने के लिए अनेक प्रयास किए गए। रेस्क्यू के लिए अनेक टीमें लगायी गयीं। रेस्क्यू टीम उसको गोरखपुर जू ले जा रही थी। रेस्क्यू टीम को उसे वापस जंगल में छोड़ने का निर्देश दिया गया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वन है तो बाघ है, बाघ है तो जैव विविधता है, जैव विविधता है तो हमारी जीव सृष्टि है और जीव सृष्टि है तो मानव सभ्यता है। अर्थात वन संरक्षण केवल मानव सभ्यता के लिए ही नहीं, बल्कि जीव सृष्टि के लिए भी अत्यन्त महत्वपूर्ण है। जीव सृष्टि में मनुष्य ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति है। मनुष्य की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वन संरक्षण के लिए अपने स्तर पर प्रयास करें। इस वर्ष के बजट में वन विभाग को अच्छी धनराशि आवंटित की गयी है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बजट में सुरक्षा के लिए पर्याप्त धनराशि आवंटित की गयी है। प्रदेश के सुरक्षा बजट को कई गुना बढ़ाया गया है। यहां कॉमन मैन की सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ नहीं हो सकता। इसी प्रकार सरकार की ओर से सामाजिक वानिकी के लिए वन विभाग को 800 करोड़ रुपये, पौधशाला प्रबंधन के लिए 220 करोड़ रुपये, वन बल आधुनिकीकरण के लिए 10 करोड़ रुपये, रानीपुर टाइगर रिजर्व के संरक्षण के लिए 50 करोड़ रुपये का कॉर्पस फण्ड, क्लीन एयर मैनेजमेण्ट के लिए 194 करोड़ रुपये और वानिकी विश्वविद्यालय के लिए 50 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 के पहले प्रदेश में गंगा डॉल्फिन लगभग समाप्त हो गई थी। प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से नमामि गंगे परियोजना के बाद आज गंगा डॉल्फिन फिर से देखने को मिल रही है। वर्ष 2023 में नदी डॉल्फिन गणना के अनुसार कुल 6,327 डॉल्फिन में से उत्तर प्रदेश में ही 2,397 डॉल्फिन पाई गईं। रेड हेडेड गिद्ध संरक्षण के लिए गोरखपुर में जटायु संरक्षण केन्द्र बनाया गया है, जो सफलतापूर्वक संचालित है। देश के नेट कार्बन लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रदेश में कार्य किए जा रहे हैं। हमारी इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी बहुत अच्छी है। आज उत्तर प्रदेश की गिनती देश के अग्रणी राज्यों में होती है। लखनऊ में एक इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगायी गयी है। प्रदेश के 07 शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए मेट्रो का संचालन किया जा रहा है। देश की पहली रैपिड रेल उत्तर प्रदेश में संचालित हो रही है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए प्रदेश में 700 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध करायी गयी हैं। देश में सर्वाधिक ई-रिक्शा भी उत्तर प्रदेश में मौजूद हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पौराणिक सिटी अयोध्या को सोलर सिटी के रूप में विकसित करने का कार्य प्रारम्भ किया है। अन्य नगर निगमों को भी सोलर सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य चल रहा है। प्रधानमंत्री जी की महत्वाकांक्षी योजना पी0एम0 सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में अब तक 1,400 मेगावॉट से अधिक विद्युत उत्पादन क्षमता के 04 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं। प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2022 में अगले 05 वर्ष अर्थात वर्ष 2027 तक 22,000 मेगावॉट रिन्युएबल एनर्जी विकसित किए जाने का लक्ष्य रखा गया था। इस दिशा में कार्य प्रारम्भ किए गए हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के लिए सरकार ने 02 सेण्टर ऑफ एक्सीलेंस हेतु धनराशि की व्यवस्था की है। यह प्रदेश में वन संरक्षण, वन आच्छादन बढ़ाने, प्रदेश में नेट जीरो लक्ष्य को हासिल करने, कार्बन क्रेडिट का लाभ अन्नदाता किसानों को दिलाने, मानव वन्य जीव संघर्ष रोकने और मानव वन्य-जीव संघर्ष को आपदा की श्रेणी में घोषित करने के क्रम में सरकार के प्रयासों का हिस्सा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जुलाई माह में आयोजित होने वाले वन महोत्सव कार्यक्रम के दौरान हम सभी की जिम्मेदारी बनती है कि कम से कम ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अवश्य लगाएं। यह अपनी माँ और धरती माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का माध्यम होगा। आज अन्तरराष्ट्रीय वन दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में विभाग द्वारा अनेक कॉफी टेबल बुक्स विमोचित करवाई गयी हैं। यह पुस्तकें केवल विभाग तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक मंत्री को भी उपलब्ध करवायी जाएं। यह पुस्तकें प्रत्येक एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों, कृषि विश्वविद्यालयों तथा वन विभाग के प्रत्येक कार्यालय में भेजी जानी चाहिए। इन पुस्तकों के माध्यम से लोगों को विभाग के बारे में बेहतर जानकारी प्राप्त हो सकेगी।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों तथा कार्बन क्रेडिट के लिए अच्छा कार्य करने वाले किसानों को सम्मानित किया गया है। इन किसानों से हमारा निरन्तर संवाद होना चाहिए। हमें नए किसानों को इसके साथ जोड़ने की कार्यवाही को भी प्रोत्साहित करना चाहिए। काष्ठ से जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहित करने की दिशा में यदि कोई किसान अपने खेत पर पेड़ लगाना चाहता है, तो हमें उसे अनुमति प्रदान करने में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरतनी चाहिए। एक पेड़ काटने पर कम से कम 10 पेड़ लगाने की शर्त रखी जानी चाहिए। इस कार्य का वेरिफिकेशन करते हुए, जिओ टैगिंग की व्यवस्था करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हमें अन्य विभागों के साथ बेहतर संवाद को आगे बढ़ाना चाहिए। 100 वर्ष पुराने वृक्षों को विरासत वृक्ष के रूप में आगे बढ़ाने की कार्यवाही आवश्यक है। देश में सबसे पुराना (05 हजार वर्ष) वृक्ष बाराबंकी में स्थित है। यह पारिजात का वृक्ष है। श्री गोरखनाथ मन्दिर प्रांगण में एक पेड़ के नीचे ‘भारत सेवा श्रम संघ’ के संस्थापक स्वामी प्रणवानन्द जी ने सन् 1912 अर्थात आज से 114 वर्ष पूर्व दीक्षा ली थी। वह आम का पेड़ आज भी उसी रूप में फैला हुआ है। उस समय भी वह पेड़ ऐसा ही था। पेड़ के पुराने चित्र उसी रूप में बने हैं। आश्चर्य की बात है कि वह एक ही पेड़ है, लेकिन शाखाएं अलग-अलग हैं। उससे कई वैरायटी के आम प्राप्त होते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि ऐसे ही वहां पर कुछ पीपल और बरगद के पेड़ हैं। उन्हें देखकर ऐसा लगता है जैसे हमें उनका आशीर्वाद प्राप्त हो रहा हो। कई पीढ़ियों को उन्होंने देखा है। इन विरासत वृक्षों का संरक्षण करना होगा तथा उन्हें कटने से बचाना होगा। यदि हम लोगों को जागरूक करेंगे तो लोग इस अभियान से जुड़ेंगे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश वन विभाग द्वारा अन्तरराष्ट्रीय वन दिवस पर आयोजित अरण्य संवाद कार्यक्रम में 17 राज्यों के वन विभाग के अधिकारी और पर्यावरण से जुड़े प्रकृति प्रेमी आए हैं। पर्यावरण की वर्तमान चुनौतियों का सामना करने की दिशा में आपसी विमर्श से सार्थक पहल को आगे बढ़ाने में आपकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। आप अपने महत्वपूर्ण सुझाव उत्तर प्रदेश को भी प्रदान कीजिएगा।
कार्यक्रम में वन विभाग द्वारा वृक्षारोपण तथा अन्य वानिकी कार्यक्रमां पर आधारित एक लघु फिल्म प्रदर्शित की गयी।
कार्यक्रम को वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अरुण कुमार सक्सेना व वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री श्री के0पी0 मलिक ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया।
इस अवसर पर सलाहकार मुख्यमंत्री श्री अवनीश कुमार अवस्थी, प्रमुख सचिव वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिर्वतन विभाग श्रीमती वी0 हेकाली ज़ीमोमी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष श्री सुनील चौधरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव श्रीमती अनुराधा वेमुरी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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