उतरौला बलरामपुर- एक फरवरी 2026 से सरकार के द्वारा गुटखा पान मसाला,खैनी,जर्दा और सिगरेट जैसे तम्बा कू उत्पादों पर नया टैक्स लागू होने के बाद पूरे बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले इन उत्पादों पर 28% जी एस टी के साथ मुआवजा उपकर लगता था, लेकिन अब इनके ऊपर लग भग 40% जी एस टी के साथ अलग से स्वास्थ्य उपकर औरउत्पाद शुल्क भी लगाया गया है। इस कारण कुल कर भार 80 से 90 प्रतिशत तक पहुंचने की बात सामने आ रही है। नए टैक्स लागू होते ही कम्पनियों ने अतिरिक्त बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर डाल रहे हैं। जिससे 5 रुपए का गुटखा 7रुपये से लेकर 8, रुपए व 10 रुपए से लेकर 12 रुपये व 15 रुपये तथा 20 रुपए और 25 रुपए या उससे अधिक पहुंच गया है। स्थानीय दुकान दारों का कहना है कि कम्पनी से ही माल महंगा मिल रहा है, इसलिए वे मजबूरी में ग्राहकों को ऊंचे दाम पर बेच रहे हैं। सरकार तम्बाकू को हानिकारक वस्तु मानते हुए उसकी खपत कम करना चाहती है। विशेषज्ञों के अनुसार इस निर्णय के पीछे तीन मुख्य कारण हैं पहला लोगों को तम्बा कू छोड़ने के लिएप्रेरित करना दूसरा कैंसर व अन्य बीमारियों पर सरकारी स्वास्थ्य खर्च कम करना व तीसरा राजस्व को बढ़ाना।
आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि दुनिया भर में “सिन टैक्स” हानिकारक वस्तु ओं पर ज्यादा कर, नीति इसी सिद्धान्त पर आधारित होती है, कि कीमत बढ़ेगी तो खपत घटेगी। *बाजार में कृत्रिम की कमी और कालाबाज़ारी जैसे हालात बढ़े हुए हैं*
उतरौला बाजार सहित आस पास के ग्रामीण अंचलों में केवल टैक्स ही कीमत बढ़ने का कारण नहीं है,बल्कि सप्लाई चेन में गड़बड़ी भी सामने आई है,टैक्स बढ़ने की खबर मिलते ही थोक व्यापारियों ने बड़े पैमाने पर स्टॉक जमा कर लिया है, बाजार में माल कम दिखाया जा रहा है, पुराने पैकेट भी नए रेट पर बेचे जा रहे हैं, और कई जगह MRP बदले बिना दाम बढ़ा दिए गए हैं। इस वजह से अभी भी पुराना 5 रुपए वाला पाउच 7 रुपए से लेकर तथा 8 रुपये लेकर 10 रुपए वाला पाउच 12 रुपये से लेकर 15 में बेचा जा  रहा है।स्थानीय किराना और पान दुकानदारों का कहना है, कि उन्हें महंगे रेट पर बन्द डिब्बे खरीदने पड़ रहे हैं। ग्राहक पुराने रेट मांगते हैं, और विवादो की स्थिति भी बन जाती है बड़े व्यापारियों के गोदामों में स्टॉक पड़ा है जब कि छोटे दुकानदार रोज रोज महंगा माल को लेने पर मजबूर हैं यानी कुल मिलाकर टैक्स का असली दबाव खुदरा दुकानदार और उपभोक्ता दोनों पर पड़ रहा है, जबकि बड़े स्टॉकिस्ट लाभ की स्थिति में हैं।ग्राहकों की प्रतिक्रिया भी मिली- जुली है। कुछ लोग मज बूरी में कम खरीद रहे हैं,जबकि नियमित सेवन करने वाले अधि क कीमत देकर भी खरीद रहे हैं। डॉक्टरों का मानना है, कि अगर कीमत लम्बे समय तक ऊंची रही, तो सेवन में कमी आ सकती है।
तम्बाकू उत्पादों पर बढ़े टैक्स का उद्देश्यस्वास्थ्य सुधार और राजस्व को बढ़ाना है,लेकिन फिल हाल बाजार में कृत्रिम की कमी, स्टॉकिंग और रेट असन्तुलन के कारण छोटे दुकानदारों पर दबाव और उप भोक्ताओं पर महंगाई का असर साफ दिख रहा है।यदि प्रशासन स्टॉक और मूल्य की निगरानी सख्ती से करे तो स्थिति संतुलित हो सकती है,अन्यथा टैक्स से ज्यादा फायदा बड़े व्यापारियों को मिलता रहेगा, और छोटे दुकान दार पिसते रहेंगे।

           हिन्दी संवाद न्यूज से
          असगर अली की खबर
           उतरौला बलरामपुर। 

Post a Comment

If you have any doubts, please let me know

और नया पुराने