मंत्री नरेंद्र कश्यप की प्रेस वार्ता, बजट 2026-27 में पिछड़ा वर्ग और दिव्यांगजन कल्याण पर फोकस
योगी सरकार का सामाजिक सरोकार, ओबीसी और दिव्यांग योजनाओं में रिकॉर्ड बजट वृद्धि
छात्रवृत्ति व्यवस्था में बदलाव, अब कोई पात्र छात्र नहीं रहेगा वंचित
आय सीमा बढ़ने से लाखों छात्रों को मिलेगा छात्रवृत्ति का लाभ
शादी अनुदान योजना का विस्तार, अधिक परिवारों तक पहुंचेगी सरकारी मदद
ओबीसी छात्रावासों के रखरखाव के लिए पहली बार अलग बजट प्रावधान
दिव्यांग पेंशन 1500 रुपये होगी, योगी सरकार का बड़ा सामाजिक सुरक्षा कदम
18 मंडलों में बनेंगे दिव्यांग पुनर्वास केंद्र, सेवाएं होंगी सुलभ
दिव्यांग छात्राओं के लिए ई-ट्राईसाइकिल योजना से बढ़ेगी सुगमता
लखनऊ, 24 फरवरी 2026।
प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने मंगलवार को अपने मंत्री आवास, 11 एनडीएमआर विक्रमादित्य मार्ग, लखनऊ में विभागीय उपलब्धियों एवं वर्ष 2026-27 के सामान्य बजट के संबंध में विस्तृत प्रेस वार्ता की। उन्होंने बताया कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार अंत्योदय की भावना के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मंत्री कश्यप ने कहा कि वर्ष 2026-27 के सामान्य बजट में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग को ऐतिहासिक बढ़ोतरी दी गई है। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का बजट इस वर्ष 3402 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत अधिक है, जबकि दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग का बजट बढ़ाकर 2140 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
मंत्री कश्यप ने बताया कि पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के अंतर्गत वर्ष 2023-24 से प्रदेश में एक भी पात्र छात्र-छात्रा छात्रवृत्ति से वंचित नहीं रहा है। यह प्रदेश के इतिहास में पहली बार हुआ है। उन्होंने कहा कि पहले छात्रवृत्ति वितरण 31 मार्च को वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन होता था, लेकिन योगी सरकार ने व्यवस्था में परिवर्तन करते हुए वर्ष 2025 में 25 सितंबर से ही छात्रवृत्ति वितरण प्रारंभ कर दिया। अब तक लगभग 20 लाख छात्र-छात्राओं को समयपूर्व छात्रवृत्ति वितरित की जा चुकी है।
उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री के निर्णय से छात्रवृत्ति हेतु अभिभावकों की आय सीमा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर दी गई है, जिससे अधिक से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिल सकेगा। पूर्वदशम छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति राशि 2250 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये किए जाने की भी घोषणा की गई है। वर्ष 2026-27 में लगभग 38 लाख विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ मिलने की संभावना है।
मंत्री कश्यप ने बताया कि पिछड़े वर्ग की गरीब बेटियों के लिए संचालित शादी अनुदान योजना के तहत वर्ष 2026-27 में 210 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। पूर्व में यह योजना केवल बीपीएल आय सीमा (ग्रामीण 46,000 और शहरी 56,000 रुपये) तक सीमित थी, जिसे बढ़ाकर अब ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में 1 लाख रुपये वार्षिक आय तक कर दिया गया है। इससे अधिक पात्र परिवारों को योजना का लाभ मिल सकेगा।
प्रदेश में संचालित 102 पिछड़ा वर्ग छात्रावासों के रखरखाव के लिए पहली बार 5 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है, ताकि छात्रावासों में आधारभूत सुविधाओं का समुचित प्रबंधन सुनिश्चित हो सके। इसके अतिरिक्त ट्रिपल सी एवं ‘ओ’ लेवल कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना के लिए भी बजट की व्यवस्था की गई है, जिससे ओबीसी वर्ग के युवा सरकारी नौकरियों के लिए सक्षम बन सकें।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए मंत्री कश्यप ने बताया कि दिव्यांगजन पेंशन राशि 1000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह होने जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पूर्व यह राशि मात्र 300 रुपये थी, जिसे योगी सरकार ने चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर अब पांच गुना तक पहुंचा दिया है। पेंशन मद में 1400 करोड़ रुपये से अधिक की व्यवस्था की गई है।
प्रदेश के सभी 18 मंडलों में दिव्यांगजन पुनर्वास केंद्र (डीआरसी) स्थापित करने का निर्णय भी कैबिनेट द्वारा लिया गया है, जिसके लिए 7 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इन केंद्रों के माध्यम से दिव्यांगता की प्रारंभिक पहचान, उपचार एवं उपकरण उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुदृढ़ होगी।
दिव्यांग छात्राओं की सुविधा के लिए 60 करोड़ रुपये की नई योजना प्रारंभ की गई है, जिसके तहत उन्हें ई-ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अतिरिक्त कृत्रिम अंग, सहायक उपकरण एवं मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल वितरण योजनाएं पूर्ववत संचालित रहेंगी।
मंत्री कश्यप ने बताया कि चित्रकूट स्थित दिव्यांग विश्वविद्यालय, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 500 करोड़ रुपये है, अब राज्य सरकार के अधीन आ चुका है। इससे प्रदेश में दिव्यांगजनों की उच्च शिक्षा एवं बौद्धिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिलेगी।



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