मंत्रिपरिषद के महत्वपूर्ण निर्णय
लखनऊ: 03 नवम्बर, 2022

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद द्वारा निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:-

‘उ0प्र0 औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022’ अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने ‘उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022’ को अनुमोदित कर दिया है। यह नीति अधिसूचित होने की तिथि से 05 वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी रहेगी। नीति में संशोधन/निरसन का प्राधिकार मंत्रिपरिषद में निहित होगा।
इस नीति में किसी भी संशोधन की दशा में, नीति में संशोधन से पूर्व अनुमोदित किये गये प्रोत्साहन के प्रतिबद्ध पैकेज समाप्त नहीं होंगे तथा इकाई उन प्रोत्साहनों का लाभ प्राप्त करने हेतु अधिकृत होगी। ‘औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017’ के अन्तर्गत अनुमोदित प्रोत्साहन पैकेज वाली इकाइयां ‘औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017’ के अन्तर्गत लाभ प्राप्त करने हेतु पूर्ववत अधिकृत रहेंगी।
प्रस्तावित नीति में विभिन्न राज्यों की नीतियों के अध्ययन तथा विस्तृत स्टेक होल्डर्स कंसल्टेशन के उपरान्त नीति को निवेशोन्मुखी तथा रोजगारपरक बनाया गया है। वर्तमान में आ रही कठिनाइयों का समाधान इसमें प्रस्तावित किया गया है। प्रख्यापन के उपरान्त 02 माह के भीतर नीति के क्रियान्वयन के सम्बन्ध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किये जाएंगे।
यह नीति प्रदेश में नवीन एवं उन्नत औद्योगिक परिदृश्य के सृजन हेतु औद्योगिक विकास एवं समस्त सेक्टर्स सहित वैल्यू चेन एवं सप्लाई चेन के विकास को प्रोत्साहित करेगी तथा एक सुदृढ़ सहयोगात्मक दृष्टिकोण के साथ उत्तर प्रदेश को वैश्विक एवं राष्ट्रीय स्तर पर एक उत्कृष्ट एवं महत्वपूर्ण निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करेगी।
प्रस्तावित नीति उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करके राज्य में रोजगार के अवसरों का सृजन करने तथा स्थायी, सर्वसमावेशी एवं संतुलित आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने में सक्षम होगी।
प्रस्तावित नीति का उद्देश्य राज्य में प्रगतिशील, अभिनव एवं प्रतिस्पर्धी औद्योगिक पारिस्थितिकी-तंत्र (Eco-System) विकसित करने के साथ राज्य में पूंजी निवेश में वृद्धि, औद्योगिक विकास हेतु गुणवत्तापूर्ण अवस्थापना सुविधाओं का विकास एवं अनुरक्षण तथा भूमि बैंक का भी सृजन करना है। व्यापार अनुकूल औद्योगिक वातावरण का सृजन करने हेतु ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (EoDB) को बढ़ावा देते हुये, कुशल व अकुशल कार्यबल/श्रमशक्ति हेतु अधिकतम प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रोजगार तथा स्व-रोजगार के अवसरों में सतत वृद्धि करना है।
प्रदेश में रोजगारपरकता एवं सशक्तिकरण सुनिश्चित करने, कार्यबल को कौशल प्रदान करने, नवाचार (Innovation) की भावना तथा उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करने तथा संतुलित, स्थाई एवं समावेशी आर्थिक विकास सुनिश्चित करने में प्रस्तावित नीति, मील का पत्थर सिद्ध होगी। यह नीति समस्त हितधारकों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के उपरान्त तैयार की गयी है।
प्रस्तावित नीति के अन्तर्गत निवेशक को योजना के प्रारम्भ (Entry Level) में ही निवेश प्रोत्साहन सब्सिडी का लाभ उठाने हेतु उपलब्ध 03 विकल्पों: (1) पूंजीगत सब्सिडी, (2) शुद्ध राज्य माल एवं सेवा कर (Net SGST) की प्रतिपूर्ति तथा (3) भारत सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेन्टिव (PLI) योजना के अन्तर्गत प्राप्त प्रोत्साहनों पर टॉप-अप में से किसी एक विकल्प को चुनने का अवसर उपलब्ध होगा।
इन लक्ष्यों को मूर्त रुप प्रदान करने हेतु भूमि सहित गुणवत्तापूर्ण अवस्थापना सुविधाओं का विकास, औद्योगिक पार्क्स, औद्योगिक कॉरिडोर्स, इंटीग्रेटेड मैन्यूफैक्चरिंग क्लस्टर, कनेक्टिविटी-सड़क मार्ग, वायुमार्ग, जलमार्ग, डिजिटल कनेक्टिविटी, विद्युत, जल एवं जल निकासी, लॉजिस्टिक्स दक्षता, वित्त पोषण की उपलब्धता तथा कुशल जनशक्ति उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में रणनीतियां बनायी जाएंगी। वैश्विक मूल्य-श्रृंखला (Global Value Chain) एकीकरण के अन्तर्गत आयात प्रतिस्थापन, निर्यात प्रोत्साहन, अनुसंधान एवं विकास (R&D), नवाचार एवं बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Right) को प्रोत्साहन, गुणवत्ता एव डिजाइन का विकास तथा एम0एस0एम0ई0, ओ0डी0ओ0पी0 एवं अन्य स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
प्रस्तावित नीति, निवेश आकर्षण हेतु ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (EoDB) में निरन्तर वृद्धि, ‘ब्रॉण्ड उत्तर प्रदेश’ की स्थापना एवं मार्केटिंग तथा निवेशकों को आकर्षक प्रोत्साहन प्रदान करने में अग्रणी सिद्ध होगी। रोजगार के अवसरों का सृजन, संतुलित क्षेत्रीय विकास तथा चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) एवं पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने में यह नीति सर्वथा सक्षम होगी।
‘उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022’ समस्त निवेशोन्मुख नीतियों को समेकित करते हुए आगामी 05 वर्षाें के लिए एक रणनीतिक ढांचा प्रदान करती है, जिसके अन्तर्गत निजी एवं सार्वजनिक निवेश सम्बन्धी निर्णय विश्वास के साथ लिये जा सकते हैं। नीति के द्वारा औद्योगिक उपयोग हेतु गैर-कृषि, बंजर एवं अनुपयोगी भूमि की पूलिंग को प्रोत्साहित करके लैण्ड बैंक सृजित किया जाना है।
नीति के अन्तर्गत राज्य में एक्सप्रेस-वेज एवं फ्रेट कॉरिडोर्स के किनारे लैण्ड बैंक तथा इण्टीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किये जाएंगे। औद्योगिक पार्काें में उपलब्ध अवस्थापना सुविधाओं का अटल इण्डस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन सहित विभिन्न संसाधनों के माध्यम से उन्नयन करना है। निजी औद्योगिक पार्काें के प्रोत्साहन हेतु राज्य सरकार द्वारा विकासकर्ता को भूमि क्रय पर स्टाम्प शुल्क पर शत-प्रतिशत छूट दी जाएगी। बुन्देलखण्ड एवं पूर्वांचल में 20 एकड़ अथवा उससे अधिक क्षेत्रफल तथा मध्यांचल एवं पश्चिमांचल में 30 एकड़ अथवा उससे अधिक क्षेत्रफल के निजी औद्योगिक पार्काें के विकासकर्ताओं को प्रोत्साहित किया जाएगा। सम्पूर्ण प्रदेश में कहीं भी 100 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में विकसित निजी औद्योगिक पार्काें के विकासकर्ता को प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रस्तावित नीति में त्वरित (फास्ट ट्रैक) भूमि आवंटन की व्यवस्था की गयी है।
प्रस्तावित नीति में राज्य में उद्योगों को गुणवत्तापरक एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति हेतु विस्तृत कार्ययोजना परिकल्पित है। साथ ही, जलापूर्ति एवं जलनिकासी तथा लॉजिस्टिक्स दक्षता के विस्तृत उपाय किये गये हैं। वित्तीय संसाधनों की सुलभता के लिए अवस्थापना विकास कोष की स्थापना, स्टॉक एक्सचेंजों के माध्यम से इक्विटी पूंजी जुटाने हेतु प्रोत्साहन आदि प्राविधान हैं। आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के विजन को प्राप्त करने के लिए कार्ययोजना निरूपित की गयी है, जिसमें आयात प्रतिस्थापन, निर्यात प्रोत्साहन अनुसंधान एवं विकास, नवाचार एवं बौद्धिक सम्पदा अधिकार को प्रोत्साहन, गुणवत्ता एवं डिजाइन को प्रोत्साहन तथा एम0एस0एम0ई0, ओ0डी0ओ0पी0 अन्य स्थानीय उद्योगों की सहायता की समुचित व्यवस्था की गयी है।
प्रस्तावित नीति में ‘ब्रॉण्ड उत्तर प्रदेश’ की पूर्ण क्षमता को प्राप्त करने, निवेश प्रोत्साहन, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षण हेतु तथा उत्तर प्रदेश की छवि को ‘सबसे पसंदीदा निवेश गंतव्य’ के रूप में स्थापित करने हेतु व्यापक रणनीति के साथ निवेश प्रोत्साहन के लिए विस्तृत कार्ययोजना की परिकल्पना की गयी है।
राज्य के नागरिकों की समाजिक व आर्थिक स्थिति के उत्थान तथा उच्च जीवन स्तर प्रदान करने हेतु रोजगार के अवसरों में उत्तरोत्तर वृद्धि होगी। रोजगार के अवसर सृजित करने हेतु विशेष प्रोत्साहनों के साथ ही राज्य सरकार उच्च रोजगार सृजन क्षमता वाले क्षेत्रों, जैसे-हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग, एम0एस0एम0ई0 व स्टार्टअप्स आदि के लिए भी केंद्रित (Focused) उपाय करेगी। राज्य का नीतिगत् ढांचा, स्व रोजगार एवं ओ0डी0ओ0पी0 जैसे प्रमुख कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय हस्तशिल्पियों हेतु रोजगार सृजन पर भी केंद्रित होगा। यह नीति से प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार सृजन में सहायक होगी।
प्रोत्साहनों को क्रियान्वित करने के लिए 04 निवेश प्रतिबद्धता आधारित परियोजना श्रेणियां चिन्हित की गयी हैं। प्रत्येक परियोजना की पात्रता हेतु आवश्यकत न्यूनतम पूंजी निवेश को सम्बन्धित श्रेणियों के लिए निर्धारित-सीमा निवेश कहा जाएगा। 50 करोड़ रुपये से अधिक तथा 200 करोड़ रुपये से कम पूंजी निवेश को वृहद श्रेणी, 200 करोड़ रुपये से अधिक किन्तु 500 करोड़ रुपये से कम पूंजी निवेश को मेगा श्रेणी, 500 करोड़ रुपये से अधिक किन्तु 3,000 करोड़ रुपये से कम पूंजी निवेश को सुपर मेगा श्रेणी तथा 3,000 करोड़ रुपये से अधिक पूंजी निवेश को अल्ट्रा मेगा श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।
प्रस्तावित नीति में वित्तीय प्रोत्साहन, उपादान एवं रियायतों के सम्बन्ध में स्टाम्प शुल्क में छूट की व्यवस्था है। इसके तहत भूमि के क्रय पर राज्य बुन्देलखण्ड और पूर्वांचल में 100 प्रतिशत, मध्यांचल एवं पश्चिमांचल (गौतमबुद्धनगर व गाजियाबाद जनपदों को छोड़कर) क्षेत्र में 75 प्रतिशत तथा गौतमबुद्धनगर व गाजियाबाद जनपदों में 50 प्रतिशत स्टाम्प शुल्क में छूट दी जाएगी।
एकल (स्टैण्ड अलोन) अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं के सृजन पर व्यय के 25 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति की जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा 10 करोड़ रुपये होगी। यह प्रतिपूर्ति इस नीति में प्रदत्त निवेश प्रोत्साहन सब्सिडी एवं स्टाम्प शुल्क की प्रतिपूर्ति के अतिरिक्त होगी।
निजी कम्पनियों अथवा सार्वजनिक उपक्रमों अथवा सरकारी संगठनों (भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश) को उत्कृष्टता केन्द्र (सी0ओ0ई0) स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। यह उत्कृष्टता केन्द्र प्रदेश में उद्योगों के लिए अनुसंधान एवं विकास, परीक्षण, टेक्नोलॉजी एक्यूजिशन एवं अन्य सुविधाएं प्रदान करेंगे। भारत सरकार की नीतियों के साथ डोवेटेलिंग की अनुमति दी जाएगी। उत्कृष्टता केन्द्रों के सम्बन्ध में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय कार्य समिति द्वारा निर्णय लिया जाएगा। नीति की अवधि में 10 उत्कृष्टता केन्द्रों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिसमें एक सेक्टर में अधिकतम दो हो सकते हैं।
प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा हेतु जीवन्त ईकोसिस्टम के सृजन के लिए पम्प स्टोरेज प्लाण्ट्स को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसी प्रकार की अन्य अवस्थापना श्रेणी की परियोजनाओं को मुख्यमंत्री जी के अनुमोदनोपरान्त पात्र सूची में जोड़ा जाएगा। औद्योगिक उपक्रमों को प्रदान किये जाने वाले वित्तीय प्रोत्साहनों की स्वीकृति एवं संवितरण हेतु निवेश प्रोत्साहन संस्था ‘इन्वेस्ट यू0पी0’ नोडल संस्था के रूप में कार्य करेगी। उत्कृष्टता केन्द्रों को सहातया अनुदान की स्वीकृति एवं संवितरण हेतु ‘इन्वेस्ट यू0पी0’ संस्था के रूप में कार्य करेगी।
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‘उ0प्र0 स्टार्टअप नीति-2020’ में संशोधन

मंत्रिपरिषद ने ‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2020’ में संशोधन के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2020 में संशोधन के तहत उत्कृष्टता के केन्द्रों की स्थापना के लक्ष्य को 03 से बढ़ाकर 08 किया गया है। स्टार्टअप्स को 15,000 रुपये मासिक के स्थान पर अब 17,500 रुपये मासिक भरण-पोषण भत्ता एक वर्ष तक प्रदान किया जायेगा तथा सीड कैपिटल/विपणन सहायता की धनराशि को भी 05 लाख रुपये से बढ़ाकर 7.50 लाख रुपये किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 05 लाख रुपये प्रोटोटाइप अनुदान की नई व्यवस्था भी रखी गई है। साथ ही, व्यावहारिक आवश्यकताओं के दृष्टिगत महिला नेतृत्वयुक्त स्टार्टअप, ग्रामीण प्रभाव स्टार्टअप, सर्कुलर इकोनॉमी स्टार्टअप, नवीकरणीय ऊर्जा स्टार्टअप, जलवायु परिवर्तन स्टार्टअप, व्यावसायीकरण इत्यादि की परिभाषाओं को नीति में पारिभाषित कर दिया गया है।
उ0प्र0 स्टार्टअप नीति-2020 आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, उत्तर प्रदेश शासन की अधिसूचना दिनांक 15 जुलाई 2020 द्वारा अधिसूचित की गई थी, जिसके पश्चात प्रदेश में स्टार्टअप्स तथा इन्क्यूबेटर्स की संख्या में काफी प्रगति हुई है। नीति के अन्तर्गत राज्य में 3 स्टेट ऑफ द आर्ट उत्कृष्टता के केन्द्रों की स्थापना के क्रम में एस0जी0पी0जी0आई0 तथा आई0आई0टी0 कानपुर के नोएडा परिसर में उत्कृष्टता के केन्द्र संचालित हो गये हैं। आई0आई0टी0 कानपुर परिसर में ड्रोन सेण्टर ऑफ एक्सीलेन्स की स्थापना के प्रस्ताव पर राज्य स्तरीय नीति अनुश्रवण एवं कार्यान्वयन समिति द्वारा 10 जून 2022 को संस्तुति प्रदान कर दी गई है। प्रदेश में वर्तमान में 52 शासकीय मान्यताप्राप्त इन्क्यूबेटर्स तथा लगभग 7,200 स्टार्टअप्स भारत सरकार के डी0पी0आई0आई0टी0 से पंजीकृत होकर कार्यरत हैं।
स्टार्टअप सेक्टर इतनी तेजी से विकसित हो रहा है कि पिछले 02 वर्षों में ईकोसिस्टम में हुए बदलाव के कारण नीति की समीक्षा आवश्यक हो गई है। उ0प्र0 स्टार्टअप नीति-2020 के अब तक के कार्य- प्रदर्शन, अन्य राज्यों से प्रतिस्पर्द्धा तथा फरवरी, 2023 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को ध्यान में रखते हुए विभाग द्वारा नीति लक्ष्यों को युक्तिसंगत बनाने तथा निवेशकों के लिए नीति को अधिक आकर्षक बनाने के लिए प्रोत्साहन पैकेजों के पुनर्गठन हेतु नीति में उपयुक्त संशोधन प्राविधानित किये गये हैं।
नीति में संशोधन से राज्य में स्टार्टअप ईको-सिस्टम को सुदृढ़ बनाने में सहायता होगी तथा उद्यमिता संस्कृति का विकास होगा। इससे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर सृजित होंगे। नीति के क्रियान्वयन के अन्तर्गत स्टार्टअप के नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा तथा प्रदेश के स्कूलों/कॉलेजों/विश्वविद्यालयों में नवाचार और उद्यमिता कार्यक्रम चलाये जाएंगे। ‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2020’ से लगभग 50 हजार व्यक्तियों को प्रत्यक्ष तथा 01 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन होने की सम्भावना है।
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पुलिस आयुक्त प्रणाली के पुनर्गठन के सम्बन्ध में प्रस्तावित कार्यवाहियों को स्वीकृति

मंत्रिपरिषद ने पुलिस आयुक्त प्रणाली के पुनर्गठन के सम्बन्ध में प्रस्तावित कार्यवाहियों को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके अन्तर्गत पुलिस जिला लखनऊ (ग्रामीण) को लखनऊ (नगर) पुलिस जिला में, पुलिस जिला वाराणसी (ग्रामीण) को वाराणसी (नगर) पुलिस जिला में तथा पुलिस जिला कानपुर आउटर को कानपुर (नगर) पुलिस जिला में विलय किये जाने का निर्णय लिया गया है। साथ ही, इस सम्बन्ध में प्रस्तावित अधिसूचनाओं को निर्गत किये जाने की भी स्वीकृति प्रदान की गयी है। मंत्रिपरिषद ने इसके अतिरिक्त इस कार्यवाही के उपरान्त इन पुलिस कमिश्नरेटों में प्रशासनिक विभाजन, पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के द्वारा अमल में लाये जाने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की है।
मंत्रिपरिषद ने पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ, वाराणसी व कानपुर में वित्तीय अधिकारों के निर्वहन हेतु विभागाध्यक्ष/कार्यालयाध्यक्ष घोषित किये जाने व सम्बन्धित शासनादेश वित्त व कार्मिक विभाग के परामर्श के उपरान्त निर्गत किये जाने के प्रस्ताव को भी अनुमोदित कर दिया है।
ज्ञातव्य है कि पुलिस महानिदेशक, उ0प्र0 के पत्र दिनांक 26 सितम्बर, 2022 द्वारा सूचित किया गया कि नवसृजित पुलिस जिलों-लखनऊ (ग्रामीण), कानपुर (आउटर) तथा वाराणसी (ग्रामीण) के अधीन कार्यरत थानों का भौगोलिक बिखराव के कारण जहां एक ओर कार्य के निष्पादन में प्रशासनिक/पर्यवेक्षणीय समस्यायें उत्पन्न हो रहीं हैं, वहीं दूसरी ओर जनमानस को भी अपने कार्यों/अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
यह भी सूचित किया गया कि नवसृजित पुलिस जिलों यथा-लखनऊ (ग्रामीण) कानपुर (आउटर) तथा वाराणसी (ग्रामीण) का आकार बहुत छोटा एवं थानों की संख्या कम तथा इनकी भौगोलिक स्थिति विषम है, ऐसी स्थिति में एडीजी जोन/आई0जी0 रेन्ज के द्वारा इनका पर्यवेक्षण सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा है, जिससे इन जिलों को प्रभावी महत्ता नहीं मिल पा रही है।
नवसृजित पुलिस जिलों-लखनऊ (ग्रामीण), कानपुर (आउटर) तथा वाराणसी (ग्रामीण) के सृजन के उपरान्त भी आपराधिक न्याय प्रणाली (किमिनल जस्टिस सिस्टम) के अन्य घटक जिलाधिकारी कार्यालय, न्यायालय, अभियोजन, कारागार आदि मूल जिलों के मुख्यालयों में ही अवस्थित हैं, जिनके कारण इनसे सम्बन्धित कार्यों में व्यावहारिक समस्यायें आ रही हैं, जबकि प्रशासनिक सुगमता के लिए राजस्व व पुलिस जिलों को सह-सीमावर्ती (कोटर्मिनस) होना वांछनीय है।
इन्हीं कारणों से लखनऊ, कानपुर नगर एवं वाराणसी जिलों के क्षेत्र को महानगरीय क्षेत्र के रूप में घोषित किये जाने का निर्णय लिया गया है। 02 पुलिस जिलों-लखनऊ (नगर) एवं लखनऊ (ग्रामीण) को समाहित कर पुनर्गठन कर पुलिस थानों सहित पुलिस जिला लखनऊ के रूप में अधिसूचित किये जाने का निर्णय लिया गया है। 02 पुलिस जिलों-वाराणसी (नगर) और वाराणसी (ग्रामीण) को समाहित कर पुनर्गठन कर पुलिस थानों सहित पुलिस जिला वाराणसी के रूप में अधिसूचित किये जाने का निर्णय लिया गया है। 02 पुलिस जिलों-कानपुर (नगर) और कानपुर (आउटर) को समाहित कर पुनर्गठन कर पुलिस थानों सहित पुलिस जिला कानपुर (नगर) के रूप में अधिसूचित किये जाने का निर्णय लिया गया है।
लखनऊ, गौतमबुद्धनगर, कानपुर नगर और वाराणसी के महानगरीय क्षेत्रों के समस्त सहायक पुलिस आयुक्तों, अपर पुलिस आयुक्तों, उप पुलिस आयुक्तों, अपर पुलिस आयुक्तों, संयुक्त पुलिस आयुक्तों और पुलिस आयुक्तों को कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियां प्रदान किये जाने का निर्णय लिया गया है।
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बेसिक शिक्षा विभाग हेतु सृजित महानिदेशक, स्कूल शिक्षा उ0प्र0 के पद के कार्य एवं दायित्व में माध्यमिक शिक्षा विभाग के नियंत्रणाधीन समस्त निदेशालयों को समाहित करते हुए विभिन्न कार्य एवं दायित्व प्रदान किये जाने का प्रस्ताव अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने बेसिक शिक्षा विभाग के अधीन समस्त निदेशालयों में कार्यरत अधिकारियों/कर्मचारियों पर कार्यकारी/प्रशासनिक नियंत्रण एवं बेसिक शिक्षा विभाग में संचालित महत्वपूर्ण योजनाओं के त्वरित गति से संचालन एवं प्राथमिक शिक्षा के स्तर में गुणात्मक सुधार तथा शिक्षकों की दक्षता वृद्धि हेतु सृजित महानिदेशक स्कूल शिक्षा उत्तर प्रदेश के पद के कार्य एवं दायित्व में माध्यमिक शिक्षा विभाग के नियंत्रणाधीन समस्त निदेशालयों को समाहित करते हुए विभिन्न कार्य एवं दायित्व प्रदान किये जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
मंत्रिपरिषद ने भविष्य में मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित महानिदेशक, स्कूल शिक्षा (डी0जी0एस0ई0) सम्बन्धी पद सृजन/अधिकार एवं कर्तव्य आदि के निर्णय के परिप्रेक्ष्य में किसी प्रकार के तकनीकी संशोधन हेतु मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किये जाने का निर्णय भी लिया है।
शासन के 12 दिसम्बर, 2019 के कार्यालय आदेश द्वारा निर्धारित महानिदेशक, स्कूल शिक्षा उत्तर प्रदेश के कार्य एवं दायित्वों में विस्तार करते हुए माध्यमिक शिक्षा विभाग एवं बेसिक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष के रूप में सौंपे गये कार्य/दायित्व इस प्रकार होंगे:-
(1) समस्त निदेशालयों के निदेशकों के मध्य समन्वयन का प्रभावी पर्यवेक्षण।
(2) समस्त निदेशालयों के समस्त प्रस्तावों/सूचनाओं एवं आख्याओं का परीक्षण कर शासन को प्रेषित करना।
(3) बजट प्रस्ताव प्राप्त कर परीक्षणोपरान्त प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराना।
(4) निदेशालय एवं अधीनस्थ कार्यालयों द्वारा निर्गत की गयी वित्तीय स्वीकृतियां, बजट आवंटन, व्यय एवं निधियों के प्रवाह का प्रभावी पर्यवेक्षण।
(5) निदेशालय से उपभोग प्रमाण पत्र प्राप्त कर शासन को उपलब्ध कराना।
(6) पी0एफ0एम0एस0 आधारित प्रणाली के क्रियान्वयन का पर्यवेक्षण।
(7) समस्त भर्ती प्रक्रियाओं, स्थानान्तरण, सेवा संबंधी मामलों का निस्तारण निदेशक के माध्यम से सम्पादित कराना।
(8) निदेशक के माध्यम से अध्यापकों हेतु प्रशिक्षण कैलेण्डर तैयार कराना एवं ट्रेनिंग मॉड्यूल तैयार कराकर प्रशिक्षण की व्यवस्था कराना।
(9) समस्त मानव संसाधन का प्रबन्धन निदेशक के माध्यम से करवाना तथा उसका पर्यवेक्षण करना।
(10) उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा सम्पादित किये जा रहे समस्त कार्यों को निदेशक के माध्यम से सम्पादित कराना, उसका पर्यवेक्षण करना एवं प्रशासनिक नियंत्रण करना।
(11) राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की संकल्पना के अनुसार बोर्ड परीक्षाओं में सुधार करवाना एवं प्रभावी पर्यवेक्षण करना।
(12) संस्कृत शिक्षा परिषद् से संबंधित कार्यों को निदेशक के माध्यम से सम्पादित कराना और उसका प्रभावी पर्यवेक्षण करना।
(13) माध्यमिक निदेशालय के अधीन मण्डलीय एवं जनपदीय अधिकारियों पर प्रशासनिक नियंत्रण करना।
(14) माध्यमिक शिक्षा के अन्तर्गत मानव सम्पदा प्रणाली विकसित कराकर लागू करवाना।
(15) माध्यमिक शिक्षा के अन्तर्गत विभिन्न प्रकार के आंकड़ों हेतु एकीकृत पोर्टल विकसित कराकर क्रियाशील बनवाना।
(16) निदेशक, माध्यमिक की वार्षिक गोपनीय आख्या हेतु प्रस्तावक अधिकारी होंगे।
महानिदेशक, स्कूल शिक्षा के कार्याें एवं दायित्वों में विस्तार होने से बेसिक/माध्यमिक शिक्षा विभाग के विभिन्न निदेशालयों के मध्य सकारात्मक एवं सार्थक कन्वर्जेंस स्थापित हो सकेगा, जिसके फलस्वरूप दोनों विभागों के सभी प्रकार के संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।
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उ0प्र0 डाटा सेण्टर नीति-2021 में संशोधन का प्रस्ताव अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश में डाटा सेण्टर उद्योग के क्षेत्र में निवेश वृद्धि के लिए वर्तमान डाटा सेण्टर नीति-2021 में संशोधन के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। साथ ही, इस सम्बन्ध में कोई अन्य निर्णय लिये जाने हेतु मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया है।
प्रस्तावित संशोधनों के अन्तर्गत नीति के लक्ष्यों को उच्चीकृत किया गया है तथा प्रदेश में 30,000 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश से 900 मेगावॉट क्षमता के कम से कम 08 अत्याधुनिक निजी डाटा सेण्टर पार्क्स की स्थापना परिलक्षित की गई है।
ऐसे मामलों में जहां नीति की अवधि लेटर ऑफ कम्फर्ट निर्गत होने की तिथि से 03 वर्ष के अन्दर समाप्त हो रही हो, डाटा सेण्टर पार्क/इकाई में वाणिज्यिक उत्पादन आरम्भ करने के लिए लेटर ऑफ कम्फर्ट निर्गत करने की तिथि से कम से कम 03 वर्ष का समय प्रदान किये जाने का प्रस्ताव है, जिससे कि उन्हें वाणिज्यिक उत्पादन हेतु पर्याप्त समय मिल सके और उन पर नीति अवधि समाप्त होने का प्रभाव न पड़े।
इकाइयों को गैर-वित्तीय प्रोत्साहन समयान्तर्गत प्राप्त हो सकें, इसलिए निवेशकों को लेटर ऑफ कम्फर्ट निर्गत किये जाने की प्रक्रिया में समय लगने के दृष्टिगत यह प्राविधान सम्मिलित किया जा रहा है कि निवेशकों को गैर वित्तीय प्रोत्साहन, उनके निवेश प्रस्तावों की पावती पत्र निर्गत होने के उपरान्त लागू होंगे।
डाटा सेण्टर उद्योग में अनुसंधान, नवाचार तथा उद्यमिता और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नीति के अन्तर्गत, सेण्टर ऑफ एक्सीलेन्स (सी0ओ0ई0) के रूप में विश्वस्तरीय बुनियादी ढाँचे के निर्माण की भी परिकल्पना की गई है। व्यावहारिक आवश्यकता के दृष्टिगत नीति में एज डाटा सेण्टर (Edge Data Centre) तथा स्पेशल परपज वेहिकल को पारिभाषित कर दिया गया है। एज डाटा सेण्टर के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में लघु डाटा सेण्टर्स स्थापित किये जा सकेंगे।
ज्ञातव्य है कि आई0टी0 एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, उत्तर प्रदेश शासन की 28 जनवरी 2021 की अधिसूचना द्वारा ‘उत्तर प्रदेश डाटा सेण्टर नीति-2021’ अधिसूचित की गई थी, जिसके लक्ष्यों को प्राप्त कर लिया गया है। उत्तर प्रदेश डाटा सेण्टर नीति-2021 के अन्तर्गत 06 डाटा सेण्टर पार्क्स एवं एक डाटा सेण्टर यूनिट के निवेश के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनके सापेक्ष लगभग 20,000 करोड़ रुपये का निवेश तथा डाटा सेण्टर की 636 मेगावाट भण्डारण क्षमता को प्राप्त किये जाने का लक्ष्य है। प्रदेश की डाटा सेण्टर नीति की इस उपलब्धि ने प्रदेश को डाटा संग्रहण के क्षेत्र में अग्रणी बना दिया है। प्रदेश सरकार द्वारा 01 ट्रिलियन डॉलर इकोनामी के लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से फरवरी, 2023 में यू0पी0 ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की जा रही है। अतः इस परिप्रेक्ष्य में इस नीति के अन्तर्गत प्राविधानित विभिन्न प्रोत्साहनों की तुलना अन्य राज्यों की डाटा सेण्टर नीति से बेंच मार्किंग के तहत की गयी है। डाटा सेण्टर नीति को अधिक युक्तिसंगत बनाने हेतु नीति में उपयुक्त संशोधन किये जाने का अभिमत स्थिर किया गया है।
डाटा सेण्टर पार्क्स तथा डाटा सेण्टर इकाइयों की स्थापना और औद्योगीकरण के फलस्वरूप प्रदेश में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे, जिससे जनसामान्य का सामाजिक व आर्थिक उत्थान होगा। यह नीति प्रदेश में इस क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देगी, जिससे आने वाले समय में भविष्य में नई प्रौद्योगिकी का भी विकास होगा।
मंत्रिपरिषद की बैठक के उपरान्त मीडिया ब्रीफिंग में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त श्री अरविन्द कुमार ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने डाटा सेण्टर नीति के अन्तर्गत दो नये डाटा सेण्टर पार्क्स का अनुमोदन किया है। इनमें सिंगापुर की कम्पनी एस0टी0पी0 द्वारा 1130 करोड़ रुपये के निवेश से 56 मेगावॉट का डाटा सेण्टर पार्क तथा एस0के0बी0आर0 कम्पनी, सिफी टेक्नोलॉजीज के साथ मिलकर 2692 करोड़ रुपये के निवेश से 120 मेगावॉट के डाटा सेण्टर पार्क की स्थापना करेगी। इस प्रकार इन दोनों परियोजनाओं में कुल मिलाकर 3,822 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। इसमें 176 मेगावॉट की डाटा सेण्टर कैपेसिटी तैयार होगी। इन पार्काें की स्थापना से लगभग 04 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।
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उ0प्र0 सूचना प्रौद्योगिकी एवं स्टार्टअप नीति-2017 के अन्तर्गत वाणिज्यिक परिचालन आरम्भ करने हेतु अवधि निर्धारण की व्यवस्था को अंगीकृत किये जाने तथा
निवेशकों को वित्तीय प्रोत्साहनों की स्वीकृति/अनुमोदन के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश सूचना प्रौद्योगिकी एवं स्टार्टअप नीति- 2017 के अन्तर्गत वाणिज्यिक परिचालन आरम्भ करने हेतु अवधि निर्धारण की व्यवस्था को अंगीकृत किये जाने तथा मेसर्स माइक्रोसॉफ्ट इंडिया (आर0एण्डडी0) प्रा0लि0, मेसर्स एम0ए0क्यू0 इण्डिया प्रा0लि0 तथा मेसर्स वन 97 कम्यूनिकेशन्स लिमिटेड को केस-टू केस आधार पर प्रोत्साहनों हेतु अनुमोदन प्रदान कर दिया है।
ज्ञातव्य है कि मेसर्स माइक्रोसॉफ्ट इंडिया (आर0एण्डडी0) प्रा0लि0 द्वारा 2186 करोड़ रुपये के निवेश से अपनी इकाई स्थापित की जा रही है। मेसर्स एम0ए0क्यू0 इण्डिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 483 करोड़ रुपये का निवेश किया जाना प्रस्तावित है। मेसर्स वन 97 कम्यूनिकेशन्स लिमिटेड (पेटीएम) द्वारा नीति के अन्तर्गत 3 चरणों में लगभग 571 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं के लिए इकाईयों द्वारा भूमि आवंटन करा लिया गया है।
उत्तर प्रदेश सूचना प्रौद्योगिकी एवं स्टार्टअप नीति-2017 में केस-टू-केस आधारित प्रोत्साहन (इन्सेंटिव्स ऑन केस टू केस बेसिस) की व्यवस्था है।
निवेशकों के निवेश प्रस्तावों पर सशक्त समिति की बैठक में विचार-विमर्श किया गया था तथा केस-टू-केस आधार पर प्रोत्साहन अनुमन्य किये जाने हेतु मंत्रिपरिषद के अनुमोदनार्थ संस्तुति की गई थी, जिस पर मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदन प्रदान कर दिया गया।
इस निर्णय से प्रदेश में 03 वृहद सूचना प्रौद्योगिकी इकाईयों की स्थापना होगी। इससे प्रदेश की जी0डी0पी0 तथा सॉफ्टवेयर निर्यात में वृद्धि होगी। निवेशकों द्वारा इकाईयों की स्थापना और औद्योगीकरण के फलस्वरूप प्रदेश में लगभग 20,000 से अधिक व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त होने की सम्भावना है। इससे जन-सामान्य का सामाजिक आर्थिक उत्थान होगा।
इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश सूचना प्रौद्योगिकी एवं स्टार्ट-अप नीति 2017 के अन्तर्गत वाणिज्यिक परिचालन आरम्भ करने हेतु अवधि निर्धारण की व्यवस्था नहीं थी। अतः इस परिप्रेक्ष्य में मंत्रिपरिषद द्वारा नीति की अवधि में प्राप्त निवेश प्रस्तावों हेतु निवेशकों को निवेश आरम्भ करने की तिथि से वाणिज्यिक परिचालन आरम्भ करने हेतु अवधि के निर्धारण पर अनुमोदन प्रदान कर दिया गया है।
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एस0डी0जी0आई0 ग्लोबल विश्वविद्यालय, गाजियाबाद की प्रायोजक संस्था सुंदरदीप एजुकेशनल सोसाइटी, गाजियाबाद, उ0प्र0 को उ0प्र0 निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 के अन्तर्गत शर्तों के अधीन आशय पत्र निर्गत किये जाने का प्रस्ताव स्वीकृत

उत्तर प्रदेश में निजी क्षेत्र के अन्तर्गत विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन में प्राप्त प्रस्तावों के परीक्षण हेतु राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति की अध्यक्षता में गठित की गई समितियों द्वारा शासन को प्रस्तुत की गई निरीक्षण आख्याओं पर विचारोपरान्त, मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति की 20 अगस्त, 2022 की बैठक में की गई संस्तुतियों के आधार पर मंत्रिपरिषद द्वारा एस0डी0जी0आई0 ग्लोबल विश्वविद्यालय, गाजियाबाद की प्रायोजक संस्था सुंदरदीप एजुकेशनल सोसाइटी, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश को उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 की धारा 6 के प्राविधानों के अन्तर्गत शर्तों के अधीन आशय पत्र निर्गत किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
इन शर्तों के अन्तर्गत प्रायोजक संस्था द्वारा इस आशय का शपथ-पत्र प्रस्तुत किया जाएगा कि सम्पर्क मार्ग के सम्बन्ध में किसी भी प्रकार के विवाद, शासन के संज्ञान में आने पर विवाद को गुणदोष/प्रकृति को दृष्टिगत रखते हुए शासन द्वारा आशय-पत्र वापस लिया जा सकता है और प्रायोजक संस्था को कोई आपत्ति नहीं होगी। प्रायोजक संस्था द्वारा विश्वविद्यालय संचालन से पूर्व निर्मित भवन/भूखण्ड का मानचित्र गाजियाबाद विकास प्राधिकरण से नियमानुसार स्वीकृत/शमन कराने की सूचना अनुपालन आख्या के साथ उपलब्ध कराई जाएगी।
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मेजर एस0डी0 सिंह विश्वविद्यालय, फर्रुखाबाद की प्रायोजक संस्था श्री बाबू सिंह दद्दू जी एजूकेशनल ट्रस्ट, फर्रुखाबाद को उ0प्र0 निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 के अन्तर्गत आशय पत्र निर्गत किये जाने का प्रस्ताव स्वीकृत 
 
उत्तर प्रदेश में निजी क्षेत्र के अन्तर्गत विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन में प्राप्त प्रस्तावों के परीक्षण हेतु राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति की अध्यक्षता में गठित की गई समितियों द्वारा शासन को प्रस्तुत की गई निरीक्षण आख्याओं पर विचारोपरान्त, मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति की 19 सितम्बर, 2022 की बैठक में की गई संस्तुतियों के आधार पर मंत्रिपरिषद द्वारा मेजर एस0डी0 सिंह विश्वविद्यालय, फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश की प्रायोजक संस्था श्री बाबू सिंह दद्दू जी एजूकेशनल ट्रस्ट, फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश को उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 की धारा 6 के प्राविधानों के अन्तर्गत आशय पत्र निर्गत किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
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जे0एस0एस0 विश्वविद्यालय, नोएडा की प्रायोजक संस्था जे0एस0एस0 महाविद्यापीठ, गाजियाबाद को उ0प्र0 निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 की धारा 6 के प्राविधानों के अन्तर्गत शर्त के अधीन आशय पत्र निर्गत किये जाने का प्रस्ताव स्वीकृत

उत्तर प्रदेश में निजी क्षेत्र के अन्तर्गत विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन में प्राप्त प्रस्तावों के परीक्षण हेतु राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति की अध्यक्षता में गठित की गई समितियों द्वारा शासन को प्रस्तुत की गई निरीक्षण आख्याओं पर विचारोपरान्त, मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति की 20 अगस्त, 2022 की बैठक में की गई संस्तुतियों के आधार पर मंत्रिपरिषद द्वारा जे0एस0एस0 विश्वविद्यालय, नोएडा की प्रायोजक संस्था जे0एस0एस0 महाविद्यापीठ, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश को उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 की धारा 6 के प्राविधानों के अन्तर्गत शर्त के अधीन आशय पत्र निर्गत किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
इस शर्त के अन्तर्गत भूखण्ड संख्य सी-20/1 पर विश्वविद्यालय हेतु प्राधिकरण द्वारा निर्गत स्वीकृत मानचित्र की प्रति एवं भवन पूर्ण होने का प्रमाण पत्र (कम्प्लीशन सर्टिफिकेट) प्रयोजक संस्था द्वारा अनुपालन आख्या के साथ उपलब्ध कराया जाएगा।
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जनपद सिद्धार्थनगर में सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना से सम्बन्धित नहर निर्माण हेतु सिंचाई विभाग की भूमि उपलब्ध कराये जाने के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने मुख्य सचिव, उ0प्र0 की अध्यक्षता में गठित समिति की बैठक में की गई संस्तुति के क्रम में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उ0प्र0 की डुमरियागंज तहसील के ग्राम खानतारा, तप्पा-भानपुर, परगना-रसूलपुर, जिला सिद्धार्थनगर के गाटा संख्या-112, रकबा-1.0570 हे0 निष्प्रयोज्य विभागीय भूमि में से वन भूमि के समतुल्य 0.8460 हे0 भूमि प्रभागीय वनाधिकारी सिद्धार्थनगर के पक्ष में वन विभाग द्वारा लगायी गई शर्तों के क्रम में हस्तांतरित किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
ज्ञातव्य है कि जनपद सिद्धार्थनगर की वन भूमि 0.8460 हे0 भाग सरयू नहर खण्ड बांसी, सिद्धार्थनगर के कार्यक्षेत्र में कैम्पियरगंज शाखा के किमी0 25.530 के संरेखण में पड़ रही है। उक्त भाग में नहर निर्माण हेतु वन भूमि के समतुल्य अधिशासी अभियन्ता, सरयू नहर खण्ड-प्रथम बांसी, जनपद सिद्धार्थनगर के स्वामित्व में डुमरियागंज तहसील ग्राम खानतारा, तप्पा-भानपुर, परगना-रसूलपुर, जिला-सिद्धार्थनगर के गाटा संख्या-112, रकबा-1.0570 हे0 निष्प्रयोज्य विभागीय भूमि में से 0.8460 हे0 भूमि प्रभागीय वनाधिकारी, सिद्धार्थनगर के पक्ष में हस्तान्तरित की जायेगी। नहर के निर्माण हेतु वन विभाग की नहर के संरेखण में पड़ने वाली 0.8460 हे0 भूमि अधिशासी अभियन्ता, सरयू नहर खण्ड बांसी, सिद्धार्थनगर के पक्ष में हस्तान्तरित करने की समिति द्वारा संस्तुति की गई है। मंत्रिपरिषद के निर्णय के क्रम में इस हस्तान्तरण के फलस्वरूप नहर निर्माण से प्रदेश के कृषकों को सीधा लाभ मिलेगा।  
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कनहर सिंचाई परियोजना के अन्तर्गत नहर प्रणालियों के लिए आवश्यक 127.1637 हे0 वन भूमि के बदले 160.7608 हे0 गैर वन भूमि के हस्तान्तरण के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने मुख्य सचिव, उ0प्र0 की अध्यक्षता में गठित समिति की 08 फरवरी, 2022 को सम्पन्न बैठक में की गई संस्तुति के क्रम में कनहर सिंचाई परियोजना के अन्तर्गत नहर प्रणालियों के लिए आवश्यक 127.1637 हे0 वन भूमि अधिशासी अभियन्ता, कनहर निर्माण खण्ड-तृतीय, पिपरी सोनभद्र के नाम तथा उक्त के बदले सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उ0प्र0 के स्वामित्व की जनपद-सोनभद्र की दुद्धी तहसील में स्थित ग्राम भीसुर (69.811 हे0), ग्राम कोरची (62.8016 हे0) एवं ग्राम कुदरी (28.1482 हे0) अर्थात कुल 160.7608 हे0 गैर वन भूमि (कृषक भूमि) प्रभागीय वनाधिकारी, रेनूकूट वन प्रभाग, रेनूकूट सोनभद्र के नाम वन विभाग द्वारा लगायी गयी शर्तों के क्रम में हस्तान्तरित किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस हस्तान्तरण के फलस्वरूप नहर निर्माण से प्रदेश के कृषकों को सीधा लाभ मिलेगा।
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जनपद वाराणसी में प्रस्तावित एकीकृत मण्डल स्तरीय कार्यालय निर्माण सम्बन्धी परियोजना हेतु राजस्व विभाग के शासनादेश दिनांक 22 दिसम्बर, 2021 को पुनरीक्षित किये जाने का प्रस्ताव स्वीकृत

जनपद वाराणसी में प्रस्तावित एकीकृत मण्डल स्तरीय कार्यालय निर्माण सम्बन्धी परियोजना हेतु मंत्रिपरिषद ने उपाध्यक्ष वाराणसी विकास प्राधिकरण के 25 मई, 2022 के पत्र में किये गये अनुरोध के क्रम में राजस्व विभाग के शासनादेश संख्या 962/एक-5-2021-70/2021 दिनांक 22 दिसम्बर, 2021 की शर्त संख्या 04 एवं 05 को पुनरीक्षित किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। मंत्रिपरिषद द्वारा इस सम्बन्ध में यह निर्णय लिया गया कि उक्त शासनादेश मंे उल्लिखित शर्त संख्या 04 एवं 05 को पुनरीक्षित करते हुए भूमि का प्रयोग शासन द्वारा निर्गत पी0पी0पी0 गाइडलाइंस के अन्तर्गत सक्षम स्तर से स्वीकृत परियोजना हेतु ही किया जा सकेगा एवं उक्त भूमि/भूमि पर निर्मित भवन का अग्रेतर लीज/सब लीज हस्तान्तरण स्वीकृत पी0पी0पी0 परियोजना में दिये गये प्राविधानों के अन्तर्गत किया जा सकेगा। मंत्रिपरिषद द्वारा प्रश्नगत शासनादेश दिनांक 22 दिसम्बर, 2021 में यदि किसी संशोधन की आवश्यकता अनुभव होने पर मुख्यमंत्री जी को इसके लिए अधिकृत किये जाने का निर्णय भी लिया गया है।
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