बलरामपुर-महारानी लाल कुंवारी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लागू होने के 5 वर्ष पूरे होने के उपरांत एक समीक्षा बैठक अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ इकाई सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सिद्धार्थ नगर (वर्तमान में संबद्ध मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय बलरामपुर )के द्वारा पुस्तकालय सभागार में आयोजित हुई। इस बैठक में मुख्य अतिथि तथा मुख्य वक्ता महेंद्र जी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ,अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर जेपी पांडे , प्राचार्य तथा संरक्षक एबीआरएसएम ने किया। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर श्री प्रकाश मिश्र, अध्यक्ष एवीआरएसएम, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सिद्धार्थ नगर ने किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि का स्वागत पुष्प गुच्छ तथा अंग वस्त्र प्रदान कर स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ एमएलके पीजी कॉलेज बलरामपुर ने किया। तत्पश्चात प्राध्यापकों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन में आने वाले कठिनाइयों तथा उसकी उपलब्धियां पर चर्चा किया । विशेष तौर से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लागू होने में परीक्षा में होने वाली कठिनाइयों की तरफ प्राध्यापकों ने ध्यान आकर्षित किया । शिक्षकों की तरफ से यह रेखांकित किया गया की स्नातक कक्षाओं में जहां संख्या अधिक है यहां पर सेमेस्टर प्रणाली लागू न की जाए । इस व्यवस्था में अध्ययन अध्यापन कम तथा परीक्षा पर अधिक समय व्यतीत हो रहा है। वर्ष भर विद्यार्थी परीक्षार्थी ही बना रह रहा है ।इसके साथ ही छात्रों के द्वारा चुने गए विषयों में विसंगतियों को लेकर भी काफी व्यापक चर्चा हुई । विषयों के चयन में छात्रों को भविष्य में आने वाली कठिनाइयों की तरफ ध्यान आकृष्ट किया गया। दो विषयों के मुख्य रूप से चयन के आधार पर भविष्य में उनके रोजगार के प्रति अनिश्चित तथा ज्ञान की अधूरेपन की शंका व्यक्त की गई। इसके पश्चात एमएलके कॉलेज स्व वित्त पोषित शिक्षक संघ ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री महेंद्र जी को एक ज्ञापन दिया जिसमें उनके अनुदानित व्यवस्था में आमेलित करने की मांग की गई है ।अध्यापकों की तरफ से स्थानांतरण में आने वाली कठिनाइयों की तरफ भी ध्यान आकर्षित किया गया और इसमें सुधार हेतु शासन सूचित करने और लागू करने की मांग रखी गई ।राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री महेंद्र जी ने अपने उद्बोधन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मूल भावना को समझने के क्रम में यह कहा कि भारत क्या है सबसे आवश्यक है यह समझा जाए और इसके मूल में यदि हम राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मूल्यांकन करें तथा उसके पश्चात इसकी कमियों को समझ कर शासन को क्रमबद्ध रूप से सुझाव के साथ प्रस्तुत किया जाए ।श्री महेंद्र जी ने भारतीय संस्कृति ,सनातन संस्कृति, अध्ययन अध्यापन की संस्कृति, जीविकोपार्जन के लिए कौशल युक्त पाठ्यक्रम आदि विभिन्न विषयों पर व्यापक चर्चा की तथा प्राध्यापकों से यह आह्वान किया की अगस्त 2025 के प्रथम सप्ताह तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लागू होने में आने वाली चुनौतियां को क्रमबद्ध करते हुए उनके साथ सुझाव भी प्रेषित करें जिसे शासन तक पहुंचाया जा सके। इसी क्रम में यह सुनिश्चित किया गया की 30 जुलाई तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लागू होने वाले में चुनौतियों तथा समस्याओं के संदर्भ में एक बैठक महाविद्यालय में आयोजित की जाएगी ।इसके पश्चात प्रोफेसर जनार्दन प्रसाद पांडे जी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रमुख अवदानों को इंगित करते हुए भारत के लिए एक महत्वपूर्ण शिक्षा का ड्राफ़्ट बताया जो भारत को विश्व गुरु बनने में सहयोग प्रदान करेगा और इन इसमें आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के प्रति, हो जाने के प्रति संघ के संकल्प को दोहराया और सफल कार्यक्रम के लिए मुख्य अतिथि श्री महेंद्र जी सहित सभी अध्यापकों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में प्रोफेसर रेखा विश्वकर्मा , डॉ दिनेश मौर्य,डॉ रमेश शुक्ला डॉ अनामिका सिंह ,डॉ वंदना सिंह डॉक्टर श्री कृष्ण त्रिपाठी ,डॉक्टर केके सिंह, लेफ्टिनेंट डॉ देवेन्द्र कुमार चौहान,डॉ सुनील शुक्ला, डॉ राजन सिंह ,डॉ आशीष लाल, डॉक्टर पवन सिंह डॉक्टर पंकज गुप्ता ,डॉक्टर हेमा, श्रीमती पूजा मिश्रा डॉक्टर एके दीक्षित डॉ अनुज सिंह, डॉ विनीत कुमार, डॉ सुनील कुमार मिश्रा डॉ पी एन पाठक, डॉक्टर सद्गुरु प्रकाश डॉ राहुल बिसेन सहित बहुसंख्या में प्राध्यापक उपस्थित थे।
हिन्दी संवाद न्यूज से
रिपोर्टर वी. संघर्ष
बलरामपुर।
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