कहानियों से साक्षरता की मजबूत नींव रखेगी प्रदेश सरकार, बालवाटिका में होगा ‘आओ सुनें और सुनाएं कहानी’ अभियान

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर 8 सितंबर को सभी को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में आयोजन, बच्चों में भाषा, कल्पनाशीलता और रचनात्मक सोच विकसित करने पर जोर

लखनऊ: 07 सितंबर, 2026

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बुनियादी शिक्षा की मजबूत नींव बालवाटिका स्तर से ही तैयार कर रही है। इसी क्रम में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस 8 सितंबर को प्रदेश के सभी को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों, बालवाटिकाओं तथा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में ‘आओ सुनें और सुनाएं कहानी’ गतिविधि आयोजित की जाएगी।
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा-‘योगी सरकार बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत आधार देने के लिए सीखने को आनंद और रचनात्मकता से जोड़ रही है। ‘आओ सुनें और सुनाएं कहानी’ जैसी गतिविधियों से बालवाटिका के बच्चों में भाषा, कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति का विकास होगा।
महानिदेशक मोनिका रानी ने कहा  कि कहानी बच्चों के सीखने, सोचने और अपनी बात कहने का सहज माध्यम है। यह गतिविधि बालवाटिका में बच्चों की कल्पनाशीलता और रचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करते हुए साक्षरता की मजबूत नींव तैयार करने में सहायक होगी।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी के निर्देशों पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य कहानी के माध्यम से बच्चों में सुनने, समझने, अपनी बात कहने, कल्पनाशीलता और रचनात्मक सोच को विकसित करना है।
को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों एवं बालवाटिकाओं में स्वागत और स्वतंत्र खेल के बाद कहानी सत्र आयोजित होगा। इसमें राज्य स्तर से उपलब्ध बिग बुक अथवा स्थानीय कहानी में से आयु के अनुरूप ऐसी कहानी का चयन किया जाएगा, जिससे नैतिक संदेश भी मिले। कहानी के दौरान बच्चों से बंद एवं खुले छोर वाले प्रश्न पूछे जाएंगे और उन्हें उत्तर देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके बाद बच्चों से कहानी पर आधारित चित्र बनवाए जाएंगे और अपनी बात कहने का अवसर दिया जाएगा।
डायट स्तर पर भी कहानी वाचन, संवाद, प्रश्नोत्तर और रचनात्मक गतिविधियां आयोजित होंगी। इसमें आसपास की बालवाटिकाओं के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, एकेडमिक रिसोर्स पर्सन, बच्चों और अभिभावकों को भी आमंत्रित किया जाएगा। बच्चों को कागज एवं रंग देकर चित्र बनाने और उनके चित्रों को प्रदर्शित कर सराहना करने पर जोर दिया गया है। सभी बालवाटिकाओं में प्रधानाध्यापक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और शिक्षण सहयोगियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।

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