बलरामपुर- कृषक बंधुओं को गुणवत्तायुक्त उर्वरक निर्धारित मूल्य पर उपलब्ध कराने, उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी एवं अनावश्यक टैगिंग पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से शासन के निर्देशों के क्रम में जनपद  में जिला प्रशासन द्वारा व्यापक छापेमारी अभियान चलाया गया।
जिलाधिकारी डॉ विपिन कुमार जैन के निर्देश पर सहकारिता विभाग, कृषि विभाग एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों की तहसीलवार संयुक्त टीमें गठित कर जनपद के थोक, फुटकर, सहकारी एवं निजी उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों पर औचक निरीक्षण एवं छापेमारी की कार्रवाई की गई। निरीक्षण के दौरान पीओएस मशीन के माध्यम से स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया गया तथा स्टॉक रजिस्टर, बिक्री पंजिका, लाइसेंस, रेट बोर्ड, स्टॉक बोर्ड एवं अन्य अभिलेखों का गहन परीक्षण किया गया। संदिग्ध स्टॉक पाए जाने पर उर्वरकों के नमूने भी गुणवत्ता परीक्षण हेतु संग्रहित किए गए।
अभियान के अंतर्गत जनपद के कुल 25 उर्वरक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान 07 उर्वरकों के नमूने गुणवत्ता परीक्षण हेतु लिए गए। गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर मेसर्स चौधरी बीज दवा व खाद भंडार, हरनहवा परसिया, पचपेड़वा, मेसर्स चौधरी ट्रेडर्स, हरनहवा परासिया, पचपेड़वा (तुलसीपुर) तथा मेसर्स नफीस खाद एवं बीज भंडार, रजडेरवा चौराहा, पचपेड़वा के उर्वरक विक्रय प्राधिकरण-पत्र (लाइसेंस) निलंबित कर दिए गए। इसके अतिरिक्त 06 उर्वरक विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए तथा 02 विक्रेताओं को चेतावनी देते हुए भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता न करने के निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के दौरान सभी उर्वरक विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे अपने प्रतिष्ठानों पर रेट बोर्ड, स्टॉक बोर्ड एवं दुकान के नाम का साइन बोर्ड अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करें तथा सभी अभिलेख अद्यतन रखें। 
किसानों को केवल पीओएस मशीन एवं आधार आधारित सत्यापन के उपरांत उनकी बोई गई फसल की आवश्यकता के अनुसार निर्धारित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाए। किसी भी किसान को उर्वरक के साथ अन्य उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य करना अथवा किसी प्रकार की टैगिंग करना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि कोई उर्वरक विक्रेता निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर उर्वरक विक्रय करते हुए, कृत्रिम अभाव उत्पन्न करते हुए, टैगिंग करते हुए अथवा अन्य किसी प्रकार की अनियमितता करते हुए पाया जाता है तो उसके विरुद्ध उर्वरक (नियंत्रण) आदेश-1985 की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित विक्रेता की होगी।
जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही उर्वरक खरीदें, निर्धारित मूल्य पर ही उर्वरक प्राप्त करें तथा खरीद की रसीद अवश्य लें। यदि किसी भी प्रतिष्ठान पर अधिक मूल्य वसूले जाने, टैगिंग किए जाने, कृत्रिम अभाव उत्पन्न करने अथवा अन्य किसी अनियमितता की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तत्काल कृषि विभाग अथवा जिला प्रशासन को दें, ताकि ऊई हीदोषियों के विरुद्ध त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
जनपद में किसानों के हितों की सुरक्षा, उर्वरकों की सुचारु उपलब्धता एवं पारदर्शी वितरण व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन का यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

               हिन्दी संवाद न्यूज से
                रिपोर्टर वी. संघर्ष
                    बलरामपुर। 

Post a Comment

If you have any doubts, please let me know

और नया पुराने